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January 28, 2023 01:26
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राक्षस माली और माल्यवान के मरने पर सुमाली का रसातल-वास और कुबेर का लंका में वास 

 
 
     इस प्रकार जब पद्मनाभ भगवान उस राक्षसी सेना को मारते और भागते ही चले गए, तब अपनी सेना का इस प्रकार संहार होते देख माल्यवान, जो भागकर लंका तक पहुँचा था, फिर पीछे की ओर लौट पड़ा और क्रोध में भरकर, लाल-लाल नेत्र केये भगवान पुरुषोत्तम पद्मनाभ से बोला-हें नारायण! तुम पुरातन क्षात्रधर्म को नहीं जानते | क्योंकि युद्ध से भयभीत हम भगे हुओं को तुम क्षुद्रवत मार रहे हो |
 
     युद्ध से परान्मुख हुए जो मारना पाप हैं | ऐसा करने वाला पुण्यलोक स्वर्ग को नहीं पता | हें शंख-चक्र-गदाधारी! यदि तेरी इच्छा युद्ध करने की ही हैं तो आ मैं तेरे समक्ष खड़ा हूँ | मुझ पर तू अपना बल प्रयोग करे | विष्णुजी ने उसे खड़ा हुआ देखकर कहा-तुम लोगो ने देवताओं को त्रस्त कर दिया | मैंने राक्षस नाश रूप उन्हें वर दिया हैं | अत: मैं इस समय राक्षसों का विनाश कर अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण कर रहा हूँ |
 
     मैं तुम सबको अवश्य ही मार डालूँगा | भले ही तुम रसातल तक क्यों न जाओ, मैं तुम्हारा पीछा करूँगा | विष्णुजी ऐसा कर ही रहे थे कि उस रक्षसेंद्र ने उन देवदेव के वक्ष:स्थल पर अपनी अनी शक्ति चला दी | सुब्रह्मण्यप्रिय कमलनाथ भगवान ने तत्क्षण ही उस शक्ति को अपनी छाती से निकाल उसी से माल्यवान को मारा | भगवान गोविन्द के हाथ से उस छूटी शक्ति ने माल्यवान का कवच काट गिराया और उसकी छाती में प्रवेश कर उसे मूर्छित कर दिया | कुछ क्षण पश्चात वह उठा और निश्चल खड़ा हो गया |
 
     फिर उसने एक काँटेदार शूल उठा विष्णुजी को मारा | साथ ही उसने दौडकर उनकी छाती में एक घूँसा भी मारा | फिर चार हाथ पीछे हटकर गरुड़ पर भी उसने प्रहार किया | फिर तो गरुड़जी ने जो अपने पंखों की प्रचण्ड वायु उसे दी तो वह सूखे पत्तों की ढेर से उड़े पत्ते जैसे उड़ने लगा | तब अपने बड़े माल्यवान को भागते देख सुमाली भी लंका को भाग गया |
 
     माल्यवान अपनी सेना सहित लंका में जा पहुँचा | इस प्रकार कमलनाथ भगवान ने उन राक्षसों को कई बार मारा और भगाया और जब वे विष्णुजी की समक्षता न कर सके और सताये गये, तब वे अपने बाल-बच्चों सहित लंका का निवास त्यागकर पाताल में जा बसे | फिर सुमाली को राजा बना, वहीँ सालकटङ्कटा  के वश में रहने लगा | हें राम! तुमने जिन पुलस्त्य वंश वाले सब राक्षसों का संहार किया हैं, उसमे सुमाली, माल्यवान और वे माली बड़े ही भाग्यशाली और प्रधान थे | अधिक क्या कहें, ये सब रावण से भी अधिक बलवान थे |
 
     शंख-चक्र-गदाधारी भगवान विष्णु के अतिरिक्त और कोई भी इन सुर-शत्रु राक्षसों का नाश नहीं कर सकता था | अत: तुम्ही चार भुजाधारी, सनातन, अजेय अविनाशी और साक्षात नारायण हो | राक्षसों का नाश करने के लिए ही तुम्हारा अवतार हुआ हैं | हें नराधिप! आज मैंने तुम्हे समस्त राक्षसों की जैसे उत्पत्ति हुई हैं सुना दी |
 
     हें रघुत्तम! अब मैं तुम्हे रावण और उसके पुत्रों का अन्य वृत्तान्त और उनका अतुल प्रभाव सुनाता हूँ | इस प्रकार जब सुमाली रसातल में चला गया, तब श्रीकुबेरजी लंका में जा रहने लगे थे |
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