कार्तिक मास में कई शुभ तिथियां व त्योहार आते हैं। इसलिए इस धार्मिक दृष्टि से इस माह का विशेष महत्व है। दिवाली के बाद चार दिवसीय छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है। उसके बाद आंवला नवमी का त्योहार पड़ता है। इसे हर साल कार्तिक माह की शुक्ल नवमी तिथि मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर आंवला पेड़ की पूजा करना व इसकी छाया के नीचे भोजन करने का विशेष महत्व माना गया है। इसके साथ ही आंवला को प्रसाद के रूप में खाया भी जाता है। आंवला का सेवन करना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। चलिए जानते हैं आंवला नवमी के बारे में विस्तार से…

आंवला नवमी शुभ तिथि व मुहूर्त
आंवला नवमी आरंभ- 12 नवंबर 2021, शुक्रवार, सुबह 05:51 मिनट से
आंवला नवमी समाप्त- 13 नवंबर 2021, शनिवार को सुबह 05:31 मिनट तक

आंवला नवमी पूजा शुभ मुहुर्त- 12 नवंबर 2021, दिन शुक्रवार, सुबह 06:50 मिनट से दोपहर 12:10 मिनट तक

इसलिए की जाती आंवले पेड़ की पूजा
इस दिन लोग आंवला के पेड़ की पूजा और परिवार की खुशहाली व सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि व खुशहाली का वास होता है। मान्यता अनुसार कार्तिक शुक्ल की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आवंले के पेड़ में ही वास करते हैं। इसलिए इस पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही आंवला भगवान विष्णु का सबसे प्रिय फल माना जाता है। आयुर्वेद अनुसार आंवला अमृत के समान माना जाता है। इसका सेवन करने से सेहत दुरुस्त रहती है और आयु बढ़ती है।

श्रीकृष्ण भगवान से गहरा नाता
इस शुभ तिथि को अक्षय नवमी भी कहा जाता है। धार्मिक कथाओं अनुसार, इस दिन से ही द्वापर युग का आरंभ हुआ था। द्वापर युग में ही श्रीहरि के आंठवे अवतार श्रीकृष्ण ने मानव कल्याण के लिए धरती पर जन्म लिया था। इसके साथ ही कहा जाता है कि आंवला नवमी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन-गोकुल की गलियों को छोड़कर मथुरा प्रस्थान किया था। इसीलिए इस दिन से भी वृंदावन परिक्रमा भी आरंभ हो जाती है। इसके साथ मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन शुभ काम करने से उसमें बरकत रहती है। इस दिन आंवला पेड़ की पूजा करने से अक्षय फल का वरदान प्राप्त होता है।

आंवला नवमी पूजन विधि
. सुबह उठकर नहाएं व साफ कपड़े पहनें।
. आंवला के पेड़ की हल्दी, कुमकुम से पूजा करें।
. उसके बाद कच्चा दूध मिश्रित जल चढ़ाएं।
. आंवले पेड़ की परिक्रमा करें।
. पेड़ के तने में कच्चा सूत या मौली को आठ बार लपेटें।
. व्रत की कथा पढ़े या सुनें।
. पूजा समाप्त होने पर आंवला पेड़ के नीचे बैठकर परिवार के साथ भोजन करें।

आंवला नवमी पर करें ये काम
. आंवला नवमी के दिन शुभ काम करने से बरकत बनी रहती है। ऐसे में आप इस दिन कोई नया काम आरंभ कर सकते हैं।
. मान्यता है कि आंवला नवमी का व्रत रखने से अनेकों फलों की प्राप्ति होती है।
. इस दिन आंवला पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

जानिए पौराणिक कथा
एक समय की बात है एक सेठ आंवला पेड़ की पूजा करता था। साथ ही ब्राह्माणों को बेहद आदर-सत्कार देता था। मगर ये सब उसके पुत्रों को पसंद नहीं आता था। वे इसके लिए अपने पिता से झगड़ा भी करते थे। ऐसे में इन झगड़ों से परेशान होकर एक दिन सेठ घर छोड़कर दूसरे गांव चला गया। उसके वहां पर अपना निर्वाह करने के लिए एक दुकान खोल ली। उसने दुकान के आगे आंवले का एक पेड़ लगवा लिया। भगवान की कृपा से उसकी दुकान अच्छे से चलने लगी। सेठ नियम अनुसार आंवला नवमी पर व्रत-पूजा और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देता रहा। दूसरी ओर सेठ के पुत्रों का सारा कारोबार खराब हो गया। इस दौरान सेठ के पुत्रों को इस बात का अहसास हुआ कि वे अपने पिताश्री के भाग्य से ही खाते थे। तब अपनी गलती मानते हुए वे पिता के पास जाकर उनसे माफी मांगने लगे। तब सेठ ने पुत्रों को माफ करद दिया। उसके बाद पिता की आज्ञा मानकर बेटों ने आंवला पेड़ की पूजा की। इसके प्रभाव से उनके घर में पहले की तरह सुख-समृद्धि, शांति व खुशियों का वास हो गया।

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