शिव तत्व शक्ति तत्त्व दोनों भीतर ही हैं बस इसको समझकर इसे 50,50 की मात्रा में समझकर जागृत करके उसमे बहना ही आपका अहम ब्रह्मास्मि कहलाता हैं।शिव तत्व ज्वाला हैं तो शक्ति तत्व शीतल जल हैं ।

यदि ज्वाला प्रचण्ड रूप ले ले तो विनाशकारी होकर सब ध्वस्त कर देती हैं ठीक उसी प्रकार यदि शीतल जल प्रचण्ड रूप ले ले तो वो भी विनाशकारी होकर सब जलमगन करके ध्वस्त कर देता हैं ।

परंतु यदि ज्वाला तो बॅलन्स किया जाए तो उस पे अन्न पकाकर करोड़ो लोगो का पेट भरा जा सकता हैं ठीक उसी प्रकार यदि जल को भी बैलेंस किया जाए तो प्यास को भुझाया जा सकता हैं ।

कहने का अर्थ है कि विनाशकारी या परमार्थकारी कौन सा रूप चाहते हो ये आपको तय करना है , बस एक बात सदैव याद रखना यदि किसी पे अग्नि फेंकोगे तो पहले हाथ आपके ही जलेंगे क्योंकि अग्नि पहले आपने उठायी ,क्रोध पहले आपका ह्रदय जलाएगा…आगे आप स्वयम समझदार है..

सीमा पासी
आध्यात्मिक सलाहकार, हीलर,मेडिटेटर,
अम्बाला हरियाणा
संपर्क –  9817621733

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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