भीष्म अष्टमी हिन्दू धर्म के कई श्रद्धालुओं द्वारा मनाए जाने वाला धार्मिक आयोजन है। जो कि माघ महीने (हिन्दू कैलेंडर) के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बड़े ही रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन कुछ लोग गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान कर अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं तथा भीष्म पितामह की आत्मा की शांति के लिए तर्पण अनुष्ठान करते हैं।

 

 

सनातन धर्म का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है ‘महाभारत’, जिसमें भीष्म यानी कि भीष्म पितामह की भूमिका प्रमुख है। भीष्म महाभारत के एक प्रमुख पात्र होने के साथ-साथ एक महान योद्धा भी थे, जो कुरुक्षेत्र के युद्ध में लड़े और मारे गए। वे शांतनु और माँ गंगा के आठवें पुत्र थे तथा अपने पिता के सिंहासन के प्रति हमेशा वफ़ादार रहे। अपने पिता का विवाह सत्यवती से करवाने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की शपथ ली थी। उनकी इस पितृभक्ति को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें इच्छामृत्यु का वरदान दिया था अर्थात वे अपनी मृत्यु का दिन स्वयं तय कर सकते थे।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन भीष्म पितामह की पुण्यतिथि होती है। यह वह दिन है जिसे भीष्म पितामह ने स्वयं इस संसार से अपनी आत्मा के प्रस्थान के लिए चुना था। हिन्दू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, भीष्म ने अपने प्राण त्यागने से पहले 58 दिनों तक बाणों की शय्या पर प्रतीक्षा की थी और उत्तरायण के शुभ दिन पर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए अर्थात तब जब सूर्य देव दक्षिणायन की छह महीने की अवधि पूरी करने के बाद उत्तर की ओर बढ़ने लगे।

भीष्म अष्टमी- तिथि एवं पूजन मुहूर्त

भीष्म अष्टमी तिथि (भारत): 8 फरवरी, 2022

अष्टमी तिथि आरंभ: 8 फरवरी, 2022 को सुबह 6:15 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 9 फरवरी, 2022 को सुबह 8:30 बजे

पूजा मुहूर्त: प्रातः 11:29 बजे से दोपहर 1:42 बजे तक।

भीष्म अष्टमी पर शुभ योगों का निर्माण

इस वर्ष भीष्म अष्टमी के शुभ दिन पर सर्वार्थ सिद्धि योग एवं सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो इसे और भी शुभ बना रहा है। आमतौर पर इन योगों को महत्वपूर्ण आयोजनों तथा कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही यह जातकों को लंबे समय से प्रतीक्षित इच्छाओं को पूरा करने के लिए अद्भुत परिणाम प्रदान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन का व्रत करने से जातकों को संस्कारी संतान की प्राप्ति होती है। यदि आप संतान प्राप्ति के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं तो इस शुभ दिन पर उपवास करना आपके लिए फलदायी सिद्ध होगा।

भीष्म अष्टमी का महत्व

भीष्म अष्टमी के दिन लोग भीष्म पितामह के सम्मान में ‘एकोदिष्ट श्राद्ध’ का अनुष्ठान करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, यह श्राद्ध सिर्फ़ वही लोग कर सकते हैं, जिनके पिता स्वर्गवासी हो चुके हैं परंतु कुछ लोग इसका पालन नहीं करते हैं और ऐसा मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति श्राद्ध कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्राद्ध या पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और इस दिन व्रत करने से सर्वगुण संपन्न, आज्ञाकारी तथा बुद्धिमान संतान की प्राप्ति होती है।

भीष्म अष्टमी के दिन याद रखने योग्य अहम बातें:

  • भीष्म अष्टमी के दिन लोगों को गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।
  • भीष्म पितामह की आत्मा की शांति के लिए ‘तर्पण’ अनुष्ठान करें तथा अपने पूर्वजों को याद करें एवं उनका सम्मान करें।
  • इस शुभ दिन पर व्रत करें एवं भीष्म अष्टमी मंत्र का जाप करें। वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे।। भीष्म: शान्तनवो वीर: सत्यवादी जितेन्द्रिय:। आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्।।
  • भीष्म पितामह का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु के मंदिर में पूजा करें।

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