Category: गरुड़ पुराण

 

गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों में से एक है। गरुड़ पुराण वेदव्यास जी द्वारा लिखित एक पुराण है। और व्यासजी ने 18 पुराण लिखे हैं। इसमें गरुड़ पुराण भी शामिल है।

यह पुराण वैष्णव संप्रदाय के मुख्य पुराणों मेसे एक है। 18 पुराणों मेसे गरुड़ पुराण एक विशेष स्थान रखता है। गरुड़ पुराण मानव जीवन का कल्याण है। कहते है गरुड़ पुराण पढ़ने से व्यक्ति सारे सुखो को भोगता है। गरुड़ पुराण पढ़ने से व्यक्ति मोक्ष का भागिदार बनता है।

गरुड़ पुराण को पढ़ने से, आपकी आत्मा को यह ज्ञान मिलता है कि आपको कैसे कर्म करना चाहिए और कैसे कर्म नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण पढ़ने से कहते है,व्यक्ति मृत्यु के बाद भटकता नहीं और उसे सदगति प्राप्त होती है।

गरुड़ पुराण में बुरे कर्म करने पर मृत्यु के बाद आत्मा को मिलने वाली सजाओ का घोर वर्णन किया गया है। यदि आप गरुड़ पुराण में बताए गए कष्टों को भोगना नहीं चाहते हैं, तो आपको अच्छे कर्म करने चाहिए। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद कैसा जीवन होता है? स्वर्ग और नरक कैसा होता है? इस पर कुछ विशेष बातें बताई गई हैं।

यह सब का वर्णन गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है। इसमें ८४ नरक का जिक्र किया गया है। जो व्यक्ति मृत्यु के पश्चात् भोगता है।

गरुड़ पुराण ( बारहवाँ अध्याय )

“एकादशाहकृत्य-निरुपण, मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग, मध्यमषोडशी, उत्तमषोडशी एवं नारायणबलि” गरुड़जी ने कहा – हे सुरेश्वर ;- ग्यारहवें दिन के कृत्य-विधान…

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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