Category: शिव पुराण

ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम्। 

उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।

 

श्रीरुद्र संहिता प्रथम खण्ड ( दशवाँ अध्याय ) “श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार एवं त्रिदेव को आयुर्बल देना”

“श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार एवं त्रिदेव को आयुर्बल देना” परमेश्वर शिव बोले ;– हे उत्तम व्रत का पालन…

श्रीरुद्र संहिता प्रथम खण्ड ( नवाँ अध्याय ) “देवी उमा एवं भगवान शिव का प्राकट्य एवं उपदेश देना”

ब्रह्माजी बोले ;- नारद ! भगवान विष्णु द्वारा की गई अपनी स्तुति सुनकर कल्याणमयी शिव बहुत प्रसन्न हुए और देवी उमा…

श्रीरुद्र संहिता प्रथम खण्ड ( आठवाँ अध्याय ) “ब्रह्मा-विष्णु को भगवान शिव के दर्शन”

ब्रह्माजी बोले ;– मुनिश्रेष्ठ नारद! हम दोनों देवता घमंड को भूलकर निरंतर भगवान शिव का स्मरण करने लगे। हमारे मन में…

श्रीरुद्र संहिता 【प्रथम खण्ड】 सातवाँ अध्याय “विवादग्रस्त ब्रह्मा-विष्णु के मध्य अग्नि-स्तंभ का प्रकट होना”

ब्रह्माजी कहते हैं :– हे देवर्षि ! जब नारायण जल में शयन करने लगे, तब शिवजी की इच्छा से विष्णुजी की…

श्रीरुद्र संहिता ( प्रथम खण्ड ) छठा अध्याय “ब्रह्माजी द्वारा शिवतत्व का वर्णन”

  ब्रह्माजी ने कहा ;– हे नारद! तुम सदैव जगत के उपकार में लगे रहते हो। तुमने जगत के लोगों के…

श्रीरुद्र संहिता ( प्रथम खण्ड ) पाँचवा अध्याय “नारद जी का शिवतीर्थों में भ्रमण व ब्रह्माजी से प्रश्न”

सूत जी बोले ;– महर्षियो! भगवान श्रीहरि के अंतर्धान हो जाने पर मुनिश्रेष्ठ नारद शिवलिंगों का भक्तिपूर्वक दर्शन करने के लिए…

श्रीरुद्र संहिता 【प्रथम खण्ड】 चौथा अध्याय “नारद जी का भगवान विष्णु को शाप देना”

ऋषि बोले ;- हे सूत जी! रुद्रगणों के चले जाने पर नारद जी ने क्या किया और वे कहां गए? इस…

श्रीरुद्र संहिता 【प्रथम खण्ड】 तीसरा अध्याय “नारद जी का भगवान विष्णु से उनका रूप मांगना”

सूत जी बोले ;- महर्षियो! नारद जी के चले जाने पर शिवजी की इच्छा से विष्णु भगवान ने एक अद्भुत माया…

श्रीरुद्र संहिता 【प्रथम खण्ड】 दूसरा अध्याय “नारद जी की काम वासना”

सूत जी बोले :– हे ऋषियो! एक समय की बात है। ब्रह्मा पुत्र नारद जी हिमालय पर्वत की एक गुफा में…

श्रीरुद्र संहिता ( प्रथम खण्ड ) ( पहला अध्याय ) “ऋषिगणों की वार्ता”

जो विश्व की उत्पत्ति, स्थिति और लय आदि के एकमात्र कारण हैं, गिरिराजकुमारी उमा के पति हैं, जिनकी कीर्ति का…

विद्येश्वर संहिता ( पच्चीसवाँ अध्याय ) “रुद्राक्ष माहात्म्य”

सूत जी कहते हैं :– महाज्ञानी शिवस्वरूप शौनक ! भगवान शंकर के प्रिय रुद्राक्ष का माहात्म्य मैं तुम्हें सुना रहा हूं।…

विद्येश्वर संहिता ( चौबीसवाँ अध्याय ) “भस्मधारण की महिमा”

सूत जी ने कहा :– हे ऋषियो! अब मैं तुम्हारे लिए समस्त वस्तुओं को पावन करने वाले भस्म का माहात्म्य सुनाता…

विद्येश्वर संहिता ( बाइसवाँ अध्याय  ) “शिव नैवेद्य और बिल्व माहात्म्य”

  ऋषि बोले :– हे सूत जी ! हमने पूर्व में सुना है कि शिव का नैवेद्य ग्रहण नहीं करना चाहिए।…

विद्येश्वर संहिता ( इक्कीसवाँ अध्याय ) “शिवलिंग की संख्या”

  सूत जी बोले :- महर्षियो! पार्थिव लिंगों की पूजा करोड़ों यज्ञों का फल देने वाली है। कलियुग में शिवलिंग पूजन…

विद्येश्वर संहिता ( बीसवाँ अध्याय ) “पार्थिव लिंग पूजन की विधि” 

“पार्थिव लिंग पूजन की विधि”    पार्थिव लिंग की श्रेष्ठता तथा महिमा का वर्णन करते हुए सूत जी ने कहा…

विद्येश्वर संहिता ( अठारहवाँ अध्याय ) “बंधन और मोक्ष का विवेचन शिव के भस्मधारण का रहस्य”

“बंधन और मोक्ष का विवेचन शिव के भस्मधारण का रहस्य” ऋषि बोले :- सर्वज्ञों में श्रेष्ठ सूत जी! बंधन और…

विद्येश्वर संहिता ( सत्रहवाँ अध्याय ) “प्रणव का ( सिद्धि ) माहात्म्य व शिवलोक के वैभव का वर्णन”

“प्रणव का माहात्म्य व शिवलोक के वैभव का वर्णन” ऋषि बोले :- महामुनि ! आप हमें ‘प्रणव मंत्र’ का माहात्म्य…

विद्येश्वर संहिता ( सोलहवाँ अध्याय ) “देव प्रतिमा का पूजन तथा शिवलिंग के वैज्ञानिक स्वरूप का विवेचन”

“देव प्रतिमा का पूजन तथा शिवलिंग के वैज्ञानिक स्वरूप का विवेचन” ऋषियों ने कहा :- साधु शिरोमणि सूत जी! हमें…

विद्येश्वर संहिता ( पंद्रहवाँ अध्याय ) “देश, काल, पात्र और दान का विचार”

“देश, काल, पात्र और दान का विचार” shivpuran book  shivpuran story ऋषियों ने कहा :– समस्त पदार्थों के ज्ञाताओं में…

विद्येश्वर संहिता चौदहवाँ अध्याय “अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ का वर्णन”

“अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ का वर्णन” Vidyeshwara Samhita Fourteenth Chapter ऋषियों ने कहा :- प्रभो! अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ का…

विद्येश्वर संहिता ( तेरहवाँ अध्याय ) “सदाचार, संध्यावंदन, प्रणव, गायत्री जाप एवं अग्निहोत्र की विधि तथा महिमा”

“सदाचार, संध्यावंदन, प्रणव, गायत्री जाप एवं अग्निहोत्र की विधि तथा महिमा” ऋषियों ने कहा :- सूत जी! आप हमें वह…

विद्येश्वर संहिता ( बारहवाँ अध्याय ) “मोक्षदायक पुण्य क्षेत्रों का वर्णन”

“मोक्षदायक पुण्य क्षेत्रों का वर्णन” सूत जी बोले :– हे विद्वान और बुद्धिमान महर्षियो! मैं मोक्ष देने वाले शिवक्षेत्रों का…

विद्येश्वर संहिता ( ग्यारहवाँ अध्याय ) शिवलिंग की स्थापना और पूजन विधि का वर्णन

“शिवलिंग की स्थापना और पूजन विधि का वर्णन“ ऋषियों ने पूछा :- सूत जी! शिवलिंग की स्थापना कैसे करनी चाहिए…

विद्येश्वर संहिता ( दसवां अध्याय ) प्रणव एवं पंचाक्षर मंत्र की महत्ताप्रणव एवं पंचाक्षर मंत्र की महत्ता

प्रणव एवं पंचाक्षर मंत्र की महत्ता ब्रह्मा और विष्णु ने पूछा – प्रभो ! सृष्टि आदि पांच 5 कृत्यों के…

विद्येश्वर संहिता ( आठवां अध्याय ) ब्रह्मा जी का अभिमान भंग

ब्रह्मा जी का अभिमान भंग नंदीकेश्वर बोले – महादेव जी ब्रह्मा जी के छल पर अत्यंत क्रोधित हुए । उन्होंने…

विद्येश्वर संहिता ( छठा अध्याय ) ब्रह्मा – विष्णु युद्ध 

ब्रह्मा – विष्णु युद्ध  नंदिकेश्वर बोले – पूर्व काल में श्री विष्णु अपनी पत्नी लक्ष्मी जी के साथ शेष –…

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