धन धान्य और समृद्धि के पर्व धनतेरस पर पूजन शुभ मुहूर्त में करना आपके लिए और भी शुभदायक हो सकता है। मंगलवार की सुबह 11 बजकर 31 मिनट पर त्रयोदशी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन सुबह 09 बजकर 02 मिनट पर समाप्त होगी।

कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है। इस बार धनतेरस 02 नवंबर मंगलवार को है। इस दिन शाम को यमराज और भगवान धनवंतरी के साथ श्रीगणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा करने का विधान है। धन, धान्य और समृद्धि के पर्व धनतेरस पर पूजन शुभ मुहूर्त में करना आपके लिए और भी शुभदायक हो सकता है। मंगलवार की सुबह 11 बजकर 31 मिनट पर त्रयोदशी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन सुबह 09 बजकर 02 मिनट पर समाप्त होगी। धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त मंगलवार शाम 05.40 से रात्रि 08.10 तक रहेगा आचार्य ओमप्रकाश त्रिवेदी जी ने बताया कि धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। इस योग में जो भी कार्य किया जाता है। उसका तिगुना फल प्राप्त होता है।

धनतेरस पूजा करने की विधि : पहले आत्म पूजा करें फिर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक लकड़ी का पाटा लें। उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं फिर धन्वंतरि और लक्ष्मीनारायण, श्रीगणेश की पूजा करने के लिए सबसे पहले धनतेरस की शाम को पूड़ी या रोटी पर सरसों तेल का दिया जलाकर रख दें और दीपक पर रोली और चावल का तिलक लगाएं। दीपक में थोड़ा-सा मीठा डालकर भोग लगाएं फिर देवी लक्ष्मी और गणेश भगवान को कुछ पैसे चढ़ाएं। दीपक का आशीर्वाद लेकर दीये को मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज के प्रकोप से सुरक्षित रहते हैं और अकाल मृत्यु नहीं होती। इसे यमदीप दान भी कहा जाता है।दीपदान के समय इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए ।

धनतेरह की पौराणिक कथा : पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर सागर मंथन के बाद प्रकट हुए। भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था। भगवान धनवंतरी कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए ऐसी मान्यता है की इस दिन बर्तन खरीदना चाहिए। विशेषकर पीतल के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यतानुसार इस दिन की गई खरीददारी लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती है।

धनतेरस पर बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन इस बात का ख्याल रखना चाहिए कभी भी घर में नए बर्तन खाली ना रखें। बर्तन खरीद कर लाने के बाद इसे पानी से भर दें। पानी को सौभाग्य का दूसरा स्वरूप माना जाता है। इससे घर में सुख, संपन्नता आएगी। बर्तनों को खाली न रखें। ऐसा करना बेहद अशुभ होता है। इस दिन लोहे, स्टील एवं कांच के बर्तन खरीदने से बचना चाहिए।

खरीदारी करने का शुभ मुहुर्त : प्रॉपर्टी, जमीन, जायदाद, मकान, दुकान, आभूषण, सोना, चांदी, बर्तन, मूर्ति, दोपहिया व चार पहिया वाहन, टीवी, फ्रिज, एसी, कंप्यूटर, लैपटॉप खरीदने, निवेश करने और नए उद्योग की शुरुआत, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, धन, धान्य, समृद्धि के लिए एवं अन्य कीमती धातु के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त इस प्रकार है : सुबह 07.08 से 09.16 बजे तक। सुबह 09.25 से सुबह 10. 48 तक। दोपहर 12.15 से 02.29 बजे तक। शाम 04.21 बजे से शाम 05.58 बजे तक ।

साबुत धनिया दिलाएगी धन : 50 ग्राम साबुत धनिया खरीद कर धनतेरस को लाएं और उसी दिन मां लक्ष्मी और भगवान धनवंतरी के चरणों में रखें। साथ ही भगवान से अपनी मेहनत के बल पर मिलने वाले धन की मांग करें और ये जरूर मिलेगा। बाद में इस धनिया को प्रसाद के रूप में वितरित भी करें। धनतेरस के दिन झाड़ू जरूर खरीदनी चाहिए। ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है। बताया जाता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है। खरीदी गई झाड़ू का इस्तेमाल छोटी दीपावली के दिन करें।

गौ माता की पूजा : हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना जाता है, लेकिन दक्षिण भारत में एक खास परंपरा है। यहां धनतेरस पर गाय की पूजा की जाती है क्योंकि यहां के लोग गौ माता को देवी लक्ष्मी का ही एक रूप मानते हैं। इसलिए इस दिन यहां गाय का साज शृंगार करके लोग इसकी पूजा करते हैं। धनतेरस के दिन घर में दक्षिणा वर्ती शंख लाना भी शुभ माना जाता है। कहा जाता है इस शंख से देवी लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है और घर में प्रवेश करती है। रुद्राक्ष की माला खरीदना भी शुभ होता है।

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