By – Barkha Pandey

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आज आधुनिक युग मानो सारी दुनिया ही किसी-न-किसी बीमारी या सोच से परेशान है। सभी मानसिक या शारीरिक रूप से किसी ना किसी चिकिस्तक से जुड़े ही है। ध्यान साधना या भगवान को याद से भी रोग ठीक होते है, परन्तु सारी दुनिया ध्यान-साधना नहीं करते और न ही भगवान मे विश्वास करते है। जो लोग साधना करते है, उनका भी गहरा योग नहीं लगता। प्रायः माने हुए योगी भी बीमार रहते है। बीमारी से मुक्ति पाना सभी का अधिकार है। वह चाहे भगवान को माने या ना माने। रोग मुक्त सभी होना चाहते है। बीमारी या अपनी मन पसंद चीज़ो को प्राप्त करना चाहते है, कुदरत के नियमो को समझना होगा। कुदरती नियम कहता है की आप जो कुछ भी चाहते है या बनाना चाहते है उसे हर रोज़ थोड़ी देर धोहराते रहे। शहरीरिक पीरा के लिए डॉक्टरो से दवाइया तो लेते रहे और साथ मे मन ही मन धोहराते रहे मैं ठीक हो रहा हूं। विश्वास कीजिये ऐसी सोच बनाये रखे।धीरे-धीरे बीमारिया ठीक हो जाती है। अपने मन मे कभी भी किसी चीज को लेकर डाउट नहीं लाये। जैसे ही हमारे मन मे यह चलता है की मैं ठीक हो जाऊंगा या नहीं, मुझे इसमें सफलता मिलेगी या नहीं तोह वो काम नहीं होगा।
बहुत से लोग अपने बीमारी या अवस्था लेकर बहुत बड़ा चढ़ा कर बोलते है। भगवान या प्रकृति सोचती है इस व्यक्ति को इसमें ही मज़ा आ रहा है तो प्रकृति कहती है- तथास्तु
पर बीमारियां या परेशानियां और बढ़ जाती है। इसीलिए ऐसी सोच को तुरंत बंद करें। और हमेशा सकारात्मक ही सोचे। आप बार-बार खुद से सकारात्मक बाते करें। देखा गया है की व्यक्ति सही मे ठीक हो जाते हैँ।

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