देशभर में गणेश चतुर्थी या गणेश उत्सव (Ganeshotsav 2021) की तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं क्योंकि इस साल बाप्पा जल्द ही घरों में विराजने वाले हैं। सनातन धर्म में गणेश भगवान से संबंधित इस त्यौहार का विशेष महत्व बताया जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व के दौरान बाप्पा लोगों के घरों में विराजते हैं। गणेशोत्सव भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ इस त्यौहार का समापन होता है।

गणेश चतुर्थी 2021: शुभ मुहूर्त 

गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त :11:02:58 से 13:32:52 तक

अवधि :2 घंटे 29 मिनट

समय जब चन्द्र दर्शन नहीं करना है :09:11:59 से 20:52:59 तक

गणेश चतुर्थी 2021: बन रहा है शुभ संयोग 

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय के साथ-साथ विद्या, बुद्धि देवता, विघ्न विनाशक, मंगलकारी, रक्षा कारक, सिद्धि दायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में अपने जीवन में इन सभी चीजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए और अपने हर काम में मंगल और विजय प्राप्त करने के लिए लोग गणेश भगवान की पूजा अर्चना करते हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है और इसके अलावा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन विनायक गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। हालांकि हर वर्ष गणेश चतुर्थी को भक्त भगवान गणेश जी के प्राकट्य होने के वजह से इस विशेष दिन पर उनकी विशेष पूजा अर्चना करके उनकी प्रसन्नता हासिल करते हैं।

मुख्य तौर पर महाराष्ट्र में यह त्योहार गणेश उत्सव या गणेशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह 10 दिनों तक चलता है और बेहद ही भव्य पैमाने पर मनाया जाता है। इस दौरान गणेश भगवान की बड़ी-बड़ी मूर्तियां पंडालों और घरों में सजाई जाती है, विधि पूर्वक उनकी पूजा पाठ की जाती है और अंत में सम्मान और ढोल नगाड़ों के साथ झांकियां निकालकर गणेश भगवान का विसर्जन कर दिया जाता है। इस दौरान लोग उनसे इस बात का अनुरोध करते हैं कि बाप्पा आप अगले बरस जल्दी हमारे घरों में आइयेगा।

“10 सितंबर 2021 को गणेश चतुर्थी के दिन बुध और मंगल कन्या राशि में युति करेंगे तथा शुक्र और चंद्रमा की युति तुला राशि में होगी। तुला राशि शुक्र की अपनी राशि है और शुक्र और चंद्रमा को महिला प्रधान ग्रह माना जाता है इसलिए इन दोनों की युति इस भाव में होने से महिलाओं के लिए यह गणेश चतुर्थी अत्यंत शुभकारी रहेगी।

मंगल और बुध की युति बुध की राशि कन्या में होने से लोगों को गणपति बप्पा यह समझाना चाहेंगे कि व्यर्थ के वाद विवाद से दूर रहें क्योंकि जब मंगल की ऊर्जा जुबान रूपी बुध को मिलती है तो वह कड़वी हो जाती है और लोगों का मन भेदने लगती है जिससे शत्रु उत्पन्न होते हैं और शरीर में भी विकार होने लगते हैं। इसलिए हमें तोल मोल कर बोलना चाहिए तथा सभी से प्रिय वादन करना चाहिए।

इस दिन की अच्छी बात यह है कि इस दिन सूर्य और शनि अपनी-अपनी राशियों में होंगे। समाज और सरकार के लिए यह अत्यंत सुखद स्थिति रहेगी।

गणेश चतुर्थी 2021: पूजा विधि 

गणेश चतुर्थी या गणेशोत्सव का त्योहार मुख्य तौर पर 10 दिनों तक मनाया जाता है। हालांकि जो लोग अपने घरों में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं वे 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन, या 7 दिनों के लिए भी भगवान गणपति को घर ला सकते हैं और उसके बाद बाप्पा की विदाई कर सकते हैं।

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद स्नान कर लें।
  • इसके बाद भगवान गणपति का स्मरण करें और पूजा की तैयारी करें।
  • मुमकिन हो तो इस दिन लाल रंग के कपड़े या फिर पीले रंग के कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद एक साफ़ कलश में जल भरें और इसमें सुपारी डालकर कलश को साफ कपड़े से बांध दें।
  • इसके बाद एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का साफ़ कपड़ा बिछा दें।
  • स्थापना करने से पहले भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद गंगा जल से भगवान गणेश की मूर्ति को स्नान कराकर चौकी पर स्थापित करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश के साथ चौकी पर दो सुपारी (रिद्धि और सिद्धि माता के रूप में) रख दें।
  • स्थापना के बाद भगवान गणेश को फल, फूल, आदि अर्पित करें और फूल से जल अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश को रोली, अक्षत और चांदी के वर्क लगायें।
  • इसके बाद पूजा में लाल रंग के फूल, जनेऊ, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, और भोग अर्पित करें।
  • मुमकिन हो तो इस दिन मोदक अवश्य अर्पित करें।
  • इसके बाद षोडशोपचार से भगवान गणेश का पूजन करें।
  • उन्हें 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और अंत में भगवान गणेश की आरती करें इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें।

पूजा में शामिल करें भगवान गणेश के ये मंत्र 

  • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

  • ॐ श्री गं गणपतये नम: ।

महत्वपूर्ण जानकारी: यदि आप अपने घर में बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं तो उनका आपको एक छोटे बच्चे की तरह ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे में दिन में तीन बार उन्हें साफ़ और ताज़ा बने भोग अर्पित करें और उन्हें रोजाना उनकी प्रिय वस्तु मोदक का भोग लगाएं। इसके अब आप चाहें तो मोतीचूर या बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं।

गणेश उत्सव के दौरान क्या करें और क्या ना करें

  • 10 दिनों तक चलने वाले इस गणेशोत्सव के दौरान प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, शराब आदि का सेवन करने से बचें। मुख्य तौर पर चतुर्थी के दिन तो भूल से भी इन वस्तुओं का सेवन ना करें।
  • चतुर्थी के दिन चंद्रमा दर्शन करना वर्जित होता है। ऐसे में इस दौरान चंद्रमा देखने से बचें।
  • कहा जाता है कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश को पशु पक्सेषियों बेहद प्रेम है ऐसे में इन दस दिनों तक मुख्य तौर पर किसी भी पशु, पक्षी या असहाय को परेशान ना करें और जितनी हो सके उनकी सेवा करें।
  • गणेश चतुर्थी के दिन मुख्य रूप से लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। काले और सफेद वस्त्र धारण करने से बचें।
  • गणेश भगवान के भोग में कभी भी तुलसी ना शामिल करें। ऐसा करने से भगवान गणेश नाराज हो सकते हैं।
  • गणेश चतुर्थी के दिन और मुमकिन हो तो गणेशोत्सव के दौरान झूठ बोलने से बचें। किसी से छल कपट ना करें, किसी का बुरा ना चाहें और किसी को परेशान ना करें। कहा जाता है गणेश चतुर्थी के दिन झूठ बोलने से व्यक्ति को धन हानि उठानी पड़ सकती है।
  • गणेश भगवान की पुरानी मूर्ति की पूजा ना करें और ना ही उनकी दो या दो से ज्यादा मूर्तियां रखें।
  • गणेश भगवान की मूर्ति के आसपास साफ-सफाई और लाइट का बंदोबस्त करें। अंधेरे में पूजा ना करें और ना ही गणेश भगवान को अंधेरे में रखें।
  • मुमकिन हो तो गणेशोत्सव के दौरान किसी भी प्रकार के लड़ाई झगड़े, वाद-विवाद, कलह कलेश से बचें।
  • घर परिवार के सभी लोग खुशी पूर्वक और सौहार्द के साथ रहे और मिलकर गणेश भगवान की सुबह शाम पूजा अर्चना करें। कहते हैं गणेश पूजा तभी फलित होती है।

राशिनुसार भोग 

गणेश भगवान को मुख्य रूप से 10 चीजें बेहद ही प्रिय होती है। ऐसे में उनकी पूजा में लोग इन 10 चीजों को मुख्य रूप में अवश्य शामिल करते हैं। ये चीज़ें हैं: मोदक, मोतीचूर के लड्डू, बेसन के लड्डू, केला, गुड़, कोई हरी चीज़, खीर, नारियल, मखाने की खीर, और पीले रंग की कोई मिठाई।

आप गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश को इनमें से किसी भी चीज का भोग लगा सकते हैं। हालांकि यदि आप अपनी राशि के अनुसार भगवान गणेश को भोग लगाना चाहते हैं तो इसकी जानकारी हम आपको नीचे प्रदान कर रहे हैं।

मेष राशि: आप भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू अर्पित करें। इससे आपके जीवन में खुशहाली आएगी।

वृषभ राशि: इस राशि के लोग भगवान गणेश को मोदक अर्पित करें। ऐसा करने से आपके जीवन की परेशानियां दूर होंगी और तनाव से मुक्ति मिलेगी।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के लोग भगवान गणेश को गुड़ का भोग लगाएं। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

कर्क राशि: कर्क राशि के जातक भगवान गणेश को मोदक और मक्खन का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपके जीवन के सभी दुःख दूर होंगे और खुशहाली आयेगी।

सिंह राशि: सिंह राशि के जातक भगवान गणेश को गुड़ अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके जीवन में विकास होगा।

कन्या राशि: कन्या राशि के जातक गणेश भगवान को हरे मूंग और गुड़ का भोग अर्पित करें। ऐसा करने से आपको आपके जीवन में सफलता हासिल होगी और सभी रुके हुए काम अवश्य पूरे होंगे।

तुला राशि: तुला राशि के जातक भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू अर्पित करें। ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातक भगवान गणेश को लाल रंग से रंगे हुए चावल अर्पित करें। ऐसा करने से जीवन की समस्त परेशानियां दूर होगी।

धनु राशि: धनु राशि के जातक भगवान गणेश को मोदक और केला अर्पित करें। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और जीवन में खुशहाली आएगी।

मकर राशि: मकर राशि के जातक भगवान गणेश को मोती चूर के बने लड्डू अर्पित करें। ऐसा करने से आपके जीवन में भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू अर्पित करें। ऐसा करने से आपके जीवन में सफलता की प्राप्ति होगी।

मीन राशि: मीन राशि के जातक गणेश को बेसन के लड्डू और बादाम अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको खुशहाली और जीवन में संपन्नता प्राप्त होगी।

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा OmAsttro के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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