दीपावली से पहली खरीदी का महा मुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र गुरुवार को शनि गुरु की युति में आ रहा है। विशेष यह भी है कि इस दिन सुबह 6 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 42 मिनट तक सर्वार्थसिद्धि योग की साक्षी भी रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि तथा उप स्वामी बृहस्पति है। 28 अक्टूबर को दोनों ही ग्रह मकर राशि में युति कृत रहेंगे। ऐसे में नक्षत्र की शुभता को बल मिलेगा, इसका प्रभाव इस दिन खरीदी गई नवीन वस्तु तथा भविष्य के लिए किए गए निवेश में स्थाई समृद्धि का कारक बनेगा।

आचार्य ओमप्रकाश त्रिवेदी के अनुसार 27 नक्षत्रों में पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इस नक्षत्र पर शनि व गुरु की विशेष कृपा होती है। शनि को शक्ति व ऊर्जा का कारक तथा गुरु को ज्ञान तथा धन का कारक ग्रह माना जाता है। शक्ति, ऊर्जा, ज्ञान व धन यह चारों ही स्थितियां जीवन के लिए आवश्यक हैं। इस दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को नक्षत्र मंडल में प्रधानता दी गई है। इस बार 28 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र के दिन शनि व गुरु दोनों ही मकर राशि पर विराजमान रहेंगे। इस दुर्लभ योग में वस्तुओं की खरीदी स्थाई सुख व समृद्धि प्रदान करेगी।

माता हरसिद्धि का प्राकट्य उत्सव मनेगा

शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में अहोई अष्टमी पर गुरुवार को सर्वार्थसिद्धि योग व पुष्य नक्षत्र की साक्षी में माता हरसिद्धि का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। पुजारी माता हरसिद्धि का अभिषेक पूजन कर आकर्षक श्रृंगार करेंगे। मंदिर में पुष्प सज्जा होगी। शाम को दीप मालिका सजाई जाएगी।

पुष्य नक्षत्र में आज बही खाते खरीदेंगे व्यापारी

दीपावली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र में बही खाते खरीदने की परंपरा है। इस दिन व्यापारी पूजा पाठ कर नए बही खाते खरीदते हैं तथा उन्हें अपने प्रतिष्ठान में पूजन स्थल पर लाकर रख देते हैं। दीपावली के लिए बही खातों का फिर से पूजन किया जाता है। पहले पेज पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाया कर शुभ लाभ लिखा जाता है। कुछ व्यापारी सिंदूर से बीसा यंत्र भी बनाते हैं। कमरी मार्ग स्थित बही खाता निर्माता व्यापारियों ने बुधवार से नए बही खातों को रखकर दुकान सजाना शुरू कर दिया है।

पुष्य नक्षत्र आज, खरीदारी के लिए श्रेष्ठ

नागदा जंक्शन। दीपावली के पहले पुष्य नक्षत्र में खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है। पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिहाज से ही श्रेष्ठ माना जाता है।

28 अक्टूबर 2021 को पूरे दिन-रात पुष्य नक्षत्र रहेगा। गुरुवार होने से गुरु पुष्य का योग बनेगा। इस पूरे दिन में अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष को आने वाले इस योग में कोई भी वस्तु खरीदना शुभफल देने वाला होता है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। शनिवार को या शनि के नक्षत्र में जो भी कार्य किया जाता है, वह लंबे समय तक चलता है। निवेश भी लाभदायक होता है। बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं और शनि गुरु का सम्मान रखता है। बृहस्पति एवं शनि के मध्य कोई शत्रुता भी नहीं है। इसलिए, पुष्य नक्षत्र, गुरुवार को आना शुभकारी होता है। इस वर्ष गुरु एवं शनि, शनि के स्वामित्व वाली राशि में एक साथ गोचर करेंगे। दोनों मार्गी होंगे और इन पर चंद्र की दृष्टि भी होगी। जो गजकेसरी योग का निर्माण करेंगे। चंद्र धनकारक ग्रह है और यह योग सभी प्रकार से मंगलकारी होगा। 677 साल पहले, 5 नवंबर 1344 को भी गुरु-शनि की युति मकर राशि में रहते पुष्य योग गुरुवार को बना था।

क्या-क्या खरीदना शुभ होता

पुष्य नक्षत्र पर वैसी चीजें खरीदी जाती हैं, जिनका लाभ हम लंबे समय तक लेना चाहते हैं। गुरु ग्रह पीली वस्तुओं और धातुओं का कारक ग्रह है। इस कारण गुरु पुष्य में सोने की खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है, शनि लोहे का कारक ग्रह है। इस कारण कार और दोपहिया वाहनों की खरीदारी भी शुभ होती है। इसके साथ ही प्रापर्टी भी खरीदी या बुक की जा सकती है। कपड़े, अन्य धातुओं की ज्वेलरी, नए बर्तन, श्रृंगार सामग्री, मशीनरी, स्टेशनरी जैसी चीजें भी खरीदी जा सकती हैं।

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