ॐ जय जगदीश हरे आरती के पाठ से पाएं सब दुखों से झुटकारा

ओम जय जगदीश हरे (Om Jai Jagdish Hare) आरती का पाठ हिंदू धर्म में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति करता है। यह सबसे प्रचलित हिंदू आरतियों में से एक है। इस आरती में भगवान विष्णु से भक्तों द्वारा कामना की जाती है कि वह उनके सारे दुखों को दूर करने। आज अपने इस लेख में हम आपको इस आरती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे साथ ही इस लेख में आपको संपूर्ण आरती भी मिलेगी।

 

 

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे……..

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ओम जय जगदीश हरे आरती का महत्व

यह आरती सृष्टि के पालन करता माने जाने वाले भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए गाई जाती है। इस आरती को करने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। जो भी व्यक्ति प्रतिदिन इस आरती का पाठ करता है उसे करुणा के सागर कहे जाने वाले भगवान विष्णु आशीर्वाद देते हैं। इसे पाठ करने से बुरी संगति से व्यक्ति को छुटकारा मिलता है, साथ ही पारिवारिक जीवन भी अच्छा बना रहता है। साथ ही मनोवांछित फलों की प्राप्ति के लिए भी इस आरती को गाया जाता है। एकादशी के दिन व्रत रखने के बाद यदि इस आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाए तो व्यक्ति को जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है।

कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा

ओम जय जगदीश हरे एक ऐसी आरती है जिसका लगभग हर श्रद्धालु, भक्तों ने जीवन में कभी न कभी पाठ किया होता है। इस आरती का प्रतिदिन जाप करने के लिए निम्नलिखित विधि को अपनाना चाहिए।

प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें व उसके बाद इस आरती का पाठ करें। पाठ करने से पूर्व भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने धूप और दीप जलाएं अगर संभव हो तो भगवान विष्णु को फूल अर्पित करें। आरती करने के बाद हफ्ते में कम से कम 1 दिन लोगों में प्रसाद अवश्य बांटे। इसके साथ ही एकादशी के दिन यदि आप व्रत रखते हैं तो उस दिन शाम के समय सपरिवार इस आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है।

ओम जय जगदीश हरे (Om Jai Jagdish Hare) आरती से लाभ

भगवान विष्णु का गुणगान करने वाली यह आरती व्यक्ति को कई शुभ फल प्रदान करती है। इस आरती से होने वाले लाभ के बारे में नीचे बताया गया है।

इस आरती का पाठ करने से व्यक्ति में विवेक जागता है और वह बुरे कर्मों से दूर हटना शुरू कर देता है। इसके साथ ही धन संपदा की प्राप्ति के लिए भी इस आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है। जो लोग आध्यात्मिक क्षेत्र में हैं और इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं उनके लिए भी यह आरती शुभ फलदायक होती है। इस आरती के निरंतर पाठ से भगवान विष्ण व्यक्ति को मोह-माया के जंजाल से निकालकर सत्य का आभास कराते हैं। इस आरती को करने से व्यक्ति भय से मुक्त होता है। इसके साथ ही आत्मविश्वास की कमी जिन लोगों में है उन्हें भी यह आरती करनी चाहिए।

ओम जय जगदीश हरे आती का संक्षिप्त अर्थ

इस आरती में भक्त भगवान विष्णु को नमन करते हुए , यह कामना करते हैं कि विष्णु भगवान उनके दुखों और संतापों को दूर करें, क्योंकि विष्णु भगवान भक्तों के संकट को दूर करने वाले हैं। जो भी जातक इनकी आराधना करता है उसे सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है और कष्टों से छुटकारा मिलाता है। भगवान विष्णु अंतरयामी हैं और वह अपने भक्तों पर माता-पिता की तरह कृपा करें यह कामना भी आरती में की जाती है। इस आरती के जरिये भक्त भगवान से कामना करते हैं कि उनके विषय-विकारों को विष्णु भगवान दूर करें।  इस आरती को जो भी व्यक्ति सच्चे मन से करता है उसको मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु की यह आरती सभी आरतियों में सबसे ज्यादा प्रचलित है। इसको नित्य प्रतिदिन करके व्यक्ति का मन साफ होता है। साथ ही संसार की वास्तविकता से भी वह अवगत होता है। भगवान विष्णु जगत के पालनहार माने जाते हैं, भगवान राम और कृष्ण भी इन्हीं के अवतार थे। अपने अलग-अलग अवतारों में उन्होंने जगत की बुराईयों को दूर करने के लिए प्रयास किये हैं। इसलिए भक्तों को विष्णु भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा अवश्य करनी चाहिए। उनकी इस आरती के पाठ से व्यक्ति को आत्मज्ञान भी होता है इसलिए यह आरती बहुत शुभ मानी जाती है।

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