Kaal purush ke anag vibhag

 

शीर्षमुखबाहुहृदयोदराणि कटीबस्तिगुह्यसंज्ञानि ।
ऊरू जानू जङ्घे चरणाविति राशयोऽजाद्याः ।। ४ ।।

कालनरस्या वयवान् पुरुषाणां चिन्तयेत्प्रसवकाले ।
सदसद्ग्रहसंयोगात् पुष्टाः सोप द्रवास्ते च ।। ५ ।।

 

मेषादि 12 राशियों क्रम से कालपुरुष के मस्तकादि अंग है ।

यथा – मेष – मस्तक , वृष – मुख , मिथुन – भुज , कर्क – हृदय , सिंह – पेट , कन्या – कटि , तुला – बस्ती ( नाभि और लिंग के मध्य अंग ) , वृश्चिक – लिंग , धनु – जंघा , मकर – घुटना ,कुंभ – घुटना का निचला भाग और मीन -पैर है । इस प्रकार जातक के भी अंग विभाग की कल्पना करनी चाहिए । जिस राशि में शुभग्रह हो उस राशि संबंधी अंग को पुष्ट ( सबल ) और जिसमे पापग्रह हो उसको विकारयुक्त ( निर्बल ) समझना चाहिए । । ४ – ५ ।।

।। लघुजातक ।।

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