वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह का गोचर और वक्री समस्त जातकों के लिए जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही ग्रहों का आपस में युति करना भी समस्त राशियों पर अपना प्रभाव दिखाता है। ज्योतिष में ग्रहों का किसी एक राशि या स्थान पर आपस में मिलान करते हुए युति बनाना, कुछ विशेष योग का निर्माण करता है और इन योगों व युति से सीधे तौर पर राशियां प्रभावित होती है। जहाँ ये योग कई बार शुभ तो कुछ योग अशुभ भी हो सकते हैं।

आज हम इस लेख में हाल ही में बनने वाली युति और उस युति से निर्माण हो रहे योग के बारे में आपको विस्तार पूर्वक समझाने वाले हैं।

 

वृषभ में होगी बुध-शुक्र की युति 

हाल ही में 3 जून 2022, दिन शुक्रवार को बुध देव ने दोपहर 1 बजकर 07 मिनट पर अपनी वक्री गति समाप्त कर पुनः मार्गी अवस्था में वृषभ राशि में प्रवेश किया था। अब वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र भी अपनी स्वराशि में जल्द ही 18 जून 2022, शनिवार की सुबह 8 बजकर 6 मिनट पर गोचर करने वाले हैं। वृषभ में शुक्र की ये स्थिति अगले 21 दिनों तक यानी शुक्र वृष में 29 जून तक रहेंगे। ऐसे में वृषभ में शुक्र का ये गोचर वहां पहले से मौजूद बुध के साथ उनका मिलान करते हुए एक अनोखी युति का निर्माण करेगा।

 

ज्योतिष में बुध और शुक्र  

वैदिक ज्योतिष में राशि चक्र की दूसरी राशि वृषभ के स्वामी ग्रह शुक्र को माना जाता है। जबकि शुक्र देव को भोग विलास, भौतिक सुख, लग्जरी लाइफ, वैवाहिक जीवन व जीवनसाथी का कारक ग्रह मानते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।

इसके अलावा बुध को ज्योतिष में सभी ग्रहों के राजकुमार ग्रह की उपाधि प्राप्त है। मिथुन व कन्या राशि इनकी स्वराशि हैं और बुध स्वभाव से एक सौम्य ग्रह होते हैं। कारक तत्व की बात करें तो बुध को गणित, तर्क शास्त्र, वाणी, संचार, वाणिज्य, त्वचा, हास्य आदि का कारक प्राप्त होता है।

 

शुक्र-बुध युति से बनेगा शुभ योग 

अब यही बुध और शुक्र एक-साथ वृषभ राशि में संयोग बनाते हुए अत्यंत शुभ योग का निर्माण करेंगे। ज्योतिष में बुध-शुक्र की युति से बनने वाला योग “लक्ष्मी नारायण योग” कहलाता है। शास्त्रों में इस योग को बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। ये योग 18 जून से 2 जुलाई तक बनेगा, जिसके कारण बुध और शुक्र का प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा। इस प्रभाव से कई राशियों के जीवन में खासतौर से सकारात्मकता देखी जाएगी।

 

ज्योतिष में लक्ष्मी-नारायण योग

वृषभ में शुक्र और बुध की युति से बनने वाला “लक्ष्मी-नारायण योग’, इतना शुभ फल देने वाला होता है कि इस योग से दरिद्र-से-दरिद्र व्यक्ति भी धनवान बन जाता है। ऐसे में ये योग सबसे अधिक वृषभ राशि के सभी जातकों के लिए बहुत अनुकूल व शुभ रहने वाला है। वृषभ के अलावा भी इस योग से कुछ अन्य राशियों की किस्मत पर लगे ताले भी खुलेंगे, जिनके बारे में चलिए अब विस्तारपूर्वक जानते हैं:-

 

लक्ष्मी-नारायण योग से चमकेगी इन राशि वालों की किस्मत

  • मेष राशि

मेष राशि में बुध और शुक्र ग्रह की युति से द्वितीय भाव में महालक्ष्मी योग का निर्माण होगा। काल पुरुष कुंडली में द्वितीय भाव धन भाव कहलाता है। इस योग का धन भाव में बनना आर्थिक उन्नति लेकर आएगा। जिससे व्यापारी जातकों को सबसे अधिक कारोबार में अचानक किसी स्रोत से अच्छा मुनाफा मिलेगा। यदि कोई कर्ज था तो उससे भी आपको मुक्ति मिलेगी। यदि धन कही अटका हुआ था तो वो भी वापस मिलने की संभावना है। ये युति आपकी वाणी में भी मधुरता लाएगी।

 

  • कर्क राशि

कर्क राशि में बुध और शुक्र की युति से बनने वाला ये महालक्ष्मी योग आपकी राशि से एकादश भाव में बनेगा। कुंडली में एकादश भाव लाभ भाव कहलाता है। जिसके परिणामस्वरूप आपकी आय में लगातार बढ़ोतरी होने के योग बनेंगे। आप अपने प्रयासों से आमदनी के नए स्त्रोत स्थापित कर सकेंगे। कार्यक्षेत्र पर भी अच्छा मुनाफा मिलेगा। साथ ही व्यापार से जुड़े जातक अपनी समझ से कोई बड़ी डील फाइनल करने में सफल रहने वाले हैं।

 

  • सिंह राशि

ये शुभ योग सिंह राशि के दशम भाव में बनने वाला है। कुंडली के इस भाव से हम कार्यक्षेत्र और करियर को देखते हैं। ऐसे में इन भाव में इस युति का बनना जातकों को करियर में सफलता दिलाते हुए, कार्यस्थल पर उन्हें अनुकूल फल देने की संभावना बनाएगा। यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं तो आपको अपने प्रयासों से किसी करीबी की मदद से कोई नई जॉब का ऑफर मिलेगा। व्यापारी जातक भी अच्छा मुनाफ़ा कमा सकेंगे। कुछ नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन मिलने के भी योग बनने वाले हैं।

 

  • कन्या राशि

कन्या राशि के नवम भाव में बनने वाला ये योग आपके भाग्योदय का कारण बनेगा। जिसके परिणामस्वरूप आपका धार्मिक रुझान बढ़ेगा और आप किसी करीबी के साथ तीर्थ व धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाने का प्लान करेंगे। इसके अलावा आपको धन पक्ष के लिहाज़ से भी भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और आप अपनी कुछ अधूरी पड़ी इच्छाओं की पूर्ति करते हुए अपनी सुख-सुविधा में वृद्धि करने में सक्षम रहेंगे। प्रेम संबंधों में भी जातकों को अनुकूलता मिलने की संभावना रहेगी।

 

  • वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के सप्तम भाव में लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण होगा। कुंडली में इस भाव से विवाह, कारोबार और साझेदारी का ज्ञात किया जाता है। ऐसे में इस युति से जातकों को सबसे अधिक अपने दांपत्य जीवन में अनुकूलता मिलेगी। इससे आप जीवनसाथी का साथ प्राप्त करते हुए, उनके सहयोग से अपनी हर समस्या को दूर करने में सफल भी रहेंगे। यदि आप विवाह योग्य हैं तो आपको विवाह के लिए कोई सुन्दर प्रस्ताव भी मिलने के योग बनेंगे। व्यापारी जातक, खासतौर से पार्टनरशिप के व्यापार से जुड़े जातकों के अपने साझेदार के साथ संबंध बेहतर होंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव आपके व्यापार में विस्तार करने वाला है।

 

  • मकर राशि

बुध-शुक्र की युति आपके पंचम भाव में बनेगी, जिसके परिणामस्वरूप आप पर शुक्र देव की विशेष कृपा होगी। खासतौर से इस राशि के विद्यार्थियों को इस दौरान अपना बेहतर प्रदर्शन देते हुए अच्छे अंक प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। वहीं यदि आप शादीशुदा हैं तो ये समय आपको अपने जीवनसाथी से अच्छा लाभ मिलने की संभावना दर्शा रहा है। करियर की दृष्टि से भी आप पहले से बेहतर करते दिखाई देंगे।

 

  • कुंभ राशि

शुक्र-बुध की युति से बनने वाला महालक्ष्मी योग कुम्भ राशि से चतुर्थ भाव में बनेगा। कुंडली के इस भाव से भूमि, वाहन, संपत्ति और मां का विचार किया जाता है। ऐसे में इस भाव में ये युति भूमि, वाहन या मकान खरीदने का प्लान कर रहे जातकों को सफलता देगी। कुछ जातक इस दौरान अपने घर की साज-सज्जा या सुख-सुविधाओं को लेकर भी खुलकर खरीदारी करते दिखाई देंगे। हालांकि इस दौरान उन्हें अपना कुछ धन भी खर्च करना पड़ सकता है। परन्तु ये अवधि कई जातकों को अपने घर से दूर जाने के योग भी बनाएगी। वहीं करियर की बात करें तो आपके संबंध अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर रहेंगे और उनकी मदद से आप कार्यस्थल पर प्रमोशन या कोई अच्छा ट्रांसफर भी प्राप्त करेंगे।

 

 

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