अध्याय १ 

|| श्री गणेशाय नमः || 

पंचांग 

जो पांच अंगो ( चीजो ) से मिलकर बना हो वह पंचांग कहलाता है |

पांच अंगो के नाम निम्न है –

१ . तिथि , Tithi

२. वार , Vaar

३. नक्षत्र , Nakshtra

४. योग , Yog

५ . करण , Karan

आइये इन पांचो अंगो के बारे में विस्तार से जानते है |

१ . तिथि Tithi

तिथि १५  होती है , परन्तु तिथियों के नाम १६ है , ध्यान दे – १४ तिथिया एक जैसी चलती है , परन्तु शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष में अमावस्या आती है |

हर एक तिथि का एक अपना स्वामी देव होता है !

 

 

 

 

तिथियों के नाम व स्वामी 

क्रमांक  नाम  स्वामी
प्रतिपदा अग्नि
द्वितीया ब्रह्मा
तृतीया गौरी
चतुर्थी गणेश
पंचमी शेषनाग
षष्ठी कार्तिक
सप्तमी सूर्य
अष्टमी शिव
नवमी दुर्गा
१० दशमी काल ( यमराज )
११ एकादशी विश्वेदेव
१२ द्वादशी विष्णु
१३ त्रयोदशी कामदेव
१४ चतुर्दशी शिव
१५ पूर्णिमा चंद्रमा
१६ अमावस्या पितर

  

ध्यान दे अभी आपने तिथियों के स्वामी के बारे में जाना है अब आप जानेंगे तिथियों के नाम |

तिथि नाम 
१ , ६ , ११ नंदा 
२ , ७ , १२ भद्रा 
३ , ८ , १३ जया 
४ , ९ , १४ रिक्ता 
५ , १० , १५ , ३० पूर्णा 

    

ध्यान दे -: पूर्णा तिथि में पूर्णिमा ( Purnima ) शुभ है व अमावस्या ( Amawasyaa ) अशुभ है | 

इस भाग में आपने जाना पंचांग के ५ अंगो के नाम व १ अंग तिथि के बारे में पूर्ण जानकारी 

आने वाले अगले भाग में आप वार के बारे में जानेंगे | 

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
ॐ एस्ट्रो के सभी पाठको को
शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी
की हार्दिक शुभकामनाये ||

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