Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

News & Update

कुंडली रिपोर्ट , शनि रिपोर्ट , करियर रिपोर्ट , आर्थिक रिपोर्ट जैसी रिपोर्ट पाए और घर बैठे जाने अपना भाग्य अभी आर्डर करे
❣️❣️ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।❣️❣️ ज्योतिष: वेद चक्षु नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिव तराय च नमः।।>

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

January 28, 2023 15:27
Omasttro

तिथिशा वह्निकौ गौरी गणेशोऽहिर्गुहो रविः |

शिवो दुर्गान्तको विश्वे हरिः कामः शिवः शशी || ३ ||

अर्थातप्रतिपदा , द्वितीया आदि से “शुक्लपक्ष में पूर्णिमा पर्यन्त , कृष्णपक्ष में अमावस्या पर्यन्त” १५ तिथियों के क्रम से १५ स्वामी होते है | 

उदाहरण के लिए सारणी देखे :- 

 

 

तिथियों के नाम व स्वामी 

क्रमांक  नाम  स्वामी
प्रतिपदा अग्नि
द्वितीया ब्रह्मा
तृतीया गौरी
चतुर्थी गणेश
पंचमी शेषनाग
षष्ठी कार्तिक
सप्तमी सूर्य
अष्टमी शिव
नवमी दुर्गा
१० दशमी काल ( यमराज )
११ एकादशी विश्वेदेव
१२ द्वादशी विष्णु
१३ त्रयोदशी कामदेव
१४ चतुर्दशी शिव
१५ पूर्णिमा चंद्रमा
१६ अमावस्या पितर

  

विशेष – जिस तिथि के जो देवता निर्दिष्ट है , उनका पूजन , प्रतिष्ठा ( स्थापना ) , व्रत आदि उसी तिथि में करना चाहिए | जैसे – गौरी का तृतीय में , गणेश का चतुर्थी में , नागो का पंचमी में , दुर्गा का नवमी में इत्यादि और तिथिशो के नाम से तिथि का बोध करना चाहिए | जैसे – विश्व से एकादशी , हरि से द्वादशी , काम से त्रयोदशी का ज्ञान होता है  , किन्तु आचार्य ने कई स्थानों पर संख्याबोधक शब्दों से तिथियों का ज्ञान कराया है | यथा – सप्तमी के स्वामी रवि है | रवि से सप्तमी का बोध होना चाहिए , परन्तु आचार्य ने रवि शब्द से द्वादशी ( १/५/७ में तिथि रवि ) , वह्नि ( अग्नि ) से प्रतिपदा न लेकर तृतीया ( १/८ में ) शिव से अष्टमी या चतुर्दशी का ग्रहण ण करके एकादशी ( १/१० में इष्टे दश शिवाः ) ईश और रूद्र से एकादशी ( १/८ तथा ११/३४ में ) इत्यलम् |

प्रसंगवश तिथियों के कतिपय पर्यायवाचक शब्द छात्रों को शीघ्र स्मृति पथ पर लाने के निमित्त दिए जाते है – 

तिथियों के पर्यायवाची शब्द

क्रमांक  नाम  पर्यायवाची शब्द
प्रतिपदा पक्षति, आद्यतिथि, भू और चन्द्र के सभी पर्यायवाचक शब्द ( भूमि, भू, कु, शशी, इंदु आदि )
द्वितीया युग्म , द्वि , यम , और नेत्र के सभी पर्याय ( नेत्र , अक्षि , अन्तक ) अश्वि 
तृतीया अग्नि , वह्नि , हुताशन , अनल , शिवस्वेद 
चतुर्थी युग , वेद , अब्धि , उदधि 
पंचमी बाण , शर , नाग , इषु
षष्ठी स्कन्द , रस , अंग 
सप्तमी अश्व , हाय , शैल , वायु , अर्क , अद्री
अष्टमी वसु , गज , नाग , उरग 
नवमी अंक , गो , ग्रह , नन्द , दुर्गा 
१० दशमी दिक् , आशा , काष्ठा 
११ एकादशी शिव , रूद्र , ईश 
१२ द्वादशी अर्क रवि , सूर्य , हरि 
१३ त्रयोदशी विश्वे , काम , मदन 
१४ चतुर्दशी यम , इंद्र , मनु , शक्र 
१५ पूर्णिमा तिथि , पंचदशी , राका 
१६ अमावस्या अमा , दर्श , कुहू 

  

|| मुहूर्त्तचिंतामणिः ||

 

error: Content is protected !!
Join Omasttro
Scan the code

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

आपका हार्दिक स्वागत करता है ,

ॐ एस्ट्रो से अभी जुड़े 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.
%d bloggers like this: