बसंत पंचमी के बाद बड़ा पर्व होता है महाशिवरात्रि. महाशिवरात्रि के दिन भगवान महादेव शिव की आराधना की जाती है. इस दिन देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन रूद्राभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

फाल्गुन माह की चतुर्दशी को है व्रत
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और व्रत करने से मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है व विवाह में आने वाली सभी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, फाल्गुन मास के चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक कर विधिवत भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है.

1 मार्च को है महाशिवरात्रि
पंचाग के अनुसार साल 2022 में महाशिवरात्रि तिथि 1 मार्च, मंगलवार सुबह 3:16 मिनट से शुरू होकर और चतुर्दशी तिथि का समापन 2 मार्च, बुधवार सुबह 10 बजे होगा. महाशिवरात्रि के पहले प्रहर की पूजा- 1 मार्च, 2022 शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक है. इस दिन दूसरे प्रहर की पूजा- 1 मार्च रात्रि 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तक होगी. तीसरे प्रहर की पूजा- 1 मार्च रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3 :39 मिनट तक है. चौथे प्रहर की पूजा- 2 मार्च सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तक है. पारण समय- 2 मार्च, बुधवार 6:45 मिनट के बाद का है.

महाशिवरात्रि व्रत की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि कर निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण कर लें.
पूजा स्थान पर एक चौकी पर जल से भरे कलश की स्थापना करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर रखें.
भगवान शिव को रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी ,लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगटटा्, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें.
शिवपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता
पूजा के आखिर में भगवान शिव की आरती पढ़ें.
महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में जागरण का भी विशेष महत्व है. यदि आप रात्रि जागरण करते हैं तो उसमें भगवान शिव के चारों प्रहर में आरती करने का विधान है.
महाशिवरात्रि की पूजा निशित काल में करना शुभ माना जाता है.
महाशिवरात्रि के अगले दिन कुछ खाकर पारण करें

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