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आत्मनिर्भर


जिन जातकों की कुंडली में यह अनुकूलता के साथ विराजमान होता है वह आत्मनिर्भर होते हैं और अपने बलबूते पर समाज में अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसे लोग सरकारी क्षेत्रों, राजनीति आदि में अच्छी पहचान बनाने में कामयाब होते हैं। आइए जानते हैं कुंडली में सूर्य की कुछ विशेष स्थितियां जिनमें व्यक्ति आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है।

1. कुंडली में यदि सूर्य उच्च का हो यानि अपनी उच्च राशि मेष में विराजमान हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि सूर्य पर न पड़ रही हो तो व्यक्ति आत्मनिर्भर होता है।

2. यदि कुंडली में सूर्य अपनी मित्र राशि में है और किसी पाप ग्रह की दृष्टि इस पर नहीं पड़ रही तब भी व्यक्ति जीवन में आत्मनिर्भर बनता है।

3. कुंडली के प्रथम भाव में विराजमान सूर्य व्यक्ति के क्रोध में अधिकता कर सकता है और साथ ही आलस्य भी दे सकता है लेकिन इन दुर्गुणों पर यदि व्यक्ति काबू पा ले तो इस भाव में बैठा सूर्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है।

4. दशम भाव में बैठा सूर्य भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है और ऐसे व्यक्ति को करियर में सफलता मिलती है।

5. यदि लग्न कुंडली में सूर्य अच्छी राशि में विराजमान नहीं है लेकिन नवमांश कुंडली में उच्च का है तो ऐसे में भी व्यक्ति आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है।

6. नवम भाव में बैठा सूर्य व्यक्ति को परिवार और अपने धर्म से अलग करके आत्मनिर्भरता की ओर ले जा सकता है।



आचार्य ओम त्रिवेदी
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