By – Barkha Pandey

Email – barkhapandeyastro@gmail.com



यहाँ मणि का मतलब है आभूषण। शरीर का सबसे किमती सामान। यह नाभि मे स्थित है। इस का रंग पीला होता है। यह चक्र अग्नि तत्व अर्थात सूर्य से जुड़ा होता है। यह दस पंखुरियों वाला कमल है। इसका अर्थ यह है की यहाँ दस सूक्ष्म नाडिया मिलती है।जिससे प्रकाश निकलता रहता है। जो कमल की फूल की तरह दिखता है। नाभि के नीचे गोलाकार कंद है। इसी स्थान से पूरे शरीर मे फैली हुई 72000 नड़ियां है, यह नड़ियां स्थूल नहीं है वास्तव मे यह सिर्फ प्रकाश है जो दिखता नहीं। यह नड़ियां शक्ति केंद्रों, सूक्ष्म शरीर तथा आंतोयों को एक दूसरे से जोड़ता है। इससे जुडी ग्रंथि पैंक्रियास है जो हारमोन और एंजाइम बनती है। पाचन क्रिया मे सहायता करना इसका मूल कार्य है। यह चक्र आमाशय यकृत पिताशय तथा छोटी आंत और बड़ी आंत से सम्बंधित है। यह भोजन को हजम करने का चक्र है। सारे शरीर का आधार सभी अंगों को एनर्जी यहीं से मिलती है। पैर की अंगुलीयों से लेके सर के बालो तक सब को स्थूल ऊर्जा इससे चक्र से मिलती है।
पेट मे दर्द होना, गरगराहट की आवाज़ होना, कब्ज़ होना, गैस बनना, शुगर होना जैसा विकार दर्शातें है की नाभि चक्र ठीक नहीं है




शेष अगले ब्लॉग में।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
ॐ एस्ट्रो के सभी पाठको को
शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी
की हार्दिक शुभकामनाये ||

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

आपका हार्दिक स्वागत करता है ,

ॐ एस्ट्रो से अभी जुड़े 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.
%d bloggers like this: