हिन्दू कैलेंडर में हर मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पूर्णिमा (Full Moon) होती है. जो मास होता है, वह उसके साथ जुड़ जाता है. इस समय मार्गशीर्ष मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है, इसलिए इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा आने वाली है. पूर्णिमा को पूर्णमासी (Purnamasi) भी कहा जाता है क्योंकि इस तिथि को वह माह पूर्ण हो जाता है. उसके बाद अगले मास का कृष्ण पक्ष प्रारंभ होता है. हिन्दू धर्म और ज्योतिषशास्त्र में पूर्णिमा का बहुत महत्व है. इस कारण से पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है. इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 18 दिसंबर दिन शनिवार को रखा जाएगा और स्नान दान की पूर्णिमा अगले दिन 19 दिसंबर दिन शनिवार को है. आइए जानते हैं मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत करने से होने वाले लाभ के बारे में.

पूर्णिंमा के दिन तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-ध्यान के पश्चात पूजा के समय भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी संग तुलसी का पूजन अवश्य करें। साथ ही संध्याकाल में तुलसी पौधे के नीचे शुद्ध घी के दीपक जलाएं।

18 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन पूजा, जप, तप और दान से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही पितरों को मोक्ष मिलता है। इसके लिए पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। तत्पश्चात, सूर्य देव को अर्घ्य देकर नदी में काले तिल प्रवाहित करते हैं। इस दिन पूर्णिमा व्रत करने का भी विधान है। शास्त्रों में निहित है कि पूर्णिमा तिथि को सत्यनारायण कथा श्रवण मात्र से व्यक्ति को सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। साथ ही पूर्णिमा के दिन इन आसान उपाय को जरूर करें। इससे घर में सुख और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं-

धन प्राप्ति के लिए निम्न मंत्र का जाप करें

ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,

धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।।

-पूर्णिमा तिथि को पवित्र अथवा सरोवर में स्नान-ध्यान करना सर्वोत्तम माना जाता है। कोरोना काल में गंगाजल युक्त पानी से घर पर स्नान कर सकते हैं। इससे समस्त पापों का सर्वनाश होता है।



-पूर्णिंमा के दिन तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-ध्यान के पश्चात पूजा के समय भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी संग तुलसी का पूजन अवश्य करें। साथ ही संध्याकाल में तुलसी पौधे के नीचे शुद्ध घी के दीपक जलाएं।



-सनातन धर्म में आम के पत्तों का तोरण और स्वास्तिक को शुभ माना जाता है। अतः पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक चिन्ह जरूर बनाएं। साथ ही आम के पत्तों का तोरण लगाएं। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।



-कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन देवी और देवता पृथ्वी पर देव दिवाली मनाने आते हैं। इस अवसर पर गंगा नदी के किनारे गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। सामान्य दिनों में भी संध्याकाल में गंगा आरती की जाती है। अतः पूर्णिमा तिथि को संध्याकाल में दीपदान अवश्य करें। आप चाहे तो दीप जलाकर प्रवाहित भी कर सकते हैं।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत के लाभ

1. मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. सुख और मानसिक शांति मिलती है.



2. पूर्णिमा के दिन व्रत और स्नान दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन गंगा स्नान और दान से पुण्य प्राप्त होता है.



3. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा की जाती है. इनकी कृपा से जीवन सुखमय होता है. दुखों का नाश होता है. धन-धान्य की कमी नहीं होती है.




4. पूर्णिमा के दिन जिसकी कुंडली में चंद्र दोष होता है, वे लोग चंद्र दोष के उपाय करते हैं. पूर्णिमा व्रत करने एवं चंद्रमा की पूजा करने से भी चंद्र दोष दूर होता है.


5. ज्योतिष के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा और सूर्य आमने-सामने होते है. इस दिन चंद्रमा का प्रभाव मनुष्य पर अधिक होता है. इस दिन व्रत एवं चंद्रमा को जल अर्पित करने का विशेष लाभ होता है.



6. मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण का मास है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत रखने एवं सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान श्रीकृष्ण का आशीष मिलता है.

पूर्णिमा से जुड़ी अन्य बातें
बताया जाता है कि पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा समसप्तक अवस्था में रहते हैं. इस रात चंद्रमा अपने 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. पूर्णिमा के दिन अपने पूर्वजों का स्मरण किया जाता है. चंद्रमा को मन का कारण माना गया है, इसीलिए पूर्णिमा को चंद्रमा की पूजा करने से मानसिक दृढ़ता भी मिलती है.

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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