By – Barkha Pandey

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प्राण शक्ति केंद्र-चक्र

अभी तक हमने देखा की चक्र क्या होता है? चक्र कितने प्रकार के होते है? अब हम इन चक्रो के बारे में फिर से समझते है। सबसे पहले hai- मुलाधार चक्र

मुलाधार चक्र:-

इन चक्रों के बारे में एक बार फिर से समझते है। सबसे पहले है मुलाधार चक्र। जिस हम रुट चक्र या पृथ्वी चक्र भी कहते है। क्युकि इसका तत्व पृथ्वी होता है। यह पेरिनियम ( एनस और जेनिटल के बीच) में स्थित होता है। और शरीर के सबसे निचले भाग में पाया जाता है। इसके घूमने की आवृत्ति कम होती है। मुलाधार सक्रिय होने से जानवर के समान प्रवृत्ति होती है। समस्या से लड़ना है या शांत बैठे रहना है यह चेतना मुलाधार चक्र ही निर्धारित करता है। यह पाइनएल ग्लैंड से जुडा होता है। जिस व्यक्ति का मुलाधार संतुलित होता है, वह सांसारिक वस्तुओ से संतुष्ट होता है। मुलाधार ज्यादा सक्रिय होने से स्थिति में उसके शरीर में शॉर्ट सर्किट होने के गुंजाइश रहती है।
जिस व्यक्ति का मुलाधार चक्र कम सक्रिय होता है, उसमे विश्वास की कमी होती है। डर बेचैनी, व्यर्थ चिंता करने की आदत होती है। इसमें कमल की चार पंखुरिया होती है। और मुलाधार को लालरंग से दर्शाया है। इसका बीज मंत्र है लं_

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