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January 28, 2023 15:22
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नन्दा च भद्रा च जया च रिक्ता पुर्णेति तिथ्योऽशुभमध्यशास्ताः |

सितेऽसिते शस्तसमाधमाः स्युः सितज्ञभौभार्किगुरौ च सिद्धाः || ४ ||

अर्थात प्रतिपदा से शुक्लपक्ष में पूर्णिमा या कृष्णपक्ष में अमावस्या – पर्यन्त १५ – १५ तिथियों की आवृत्ति में क्रम से नंदा , भद्रा , जया , रिक्ता एवं पूर्णा संज्ञाए मानी गयी है | शुक्ल पक्ष में प्रथमावृत्ति की ( १/२/३/४/५ ) तिथियाँ अशुभ , द्वितीयावृत्ति की नंदादि ( ६/७/८/९/१० ) तिथियाँ मध्य ( न उत्तम , न मध्यम ) और तृतीयावृत्ति की नंदादि ( ११/१२/१३/१४/१५ ) तिथियाँ शुभ कही गई है | इसी तरह कृष्णपक्ष में प्रथमावृत्ति ( १/२/३/४/५ ) तिथियाँ शुभ , द्वितीयावृत्ति ( ६/७/८/९/१० ) नंदादि तिथियाँ मध्य और तृतीयावृत्ति की नंदादि ( ११/१२/१३/१४/३० ) तिथियाँ अशुभ होती है |

 

      दोनों पक्षों में तीनो आवृत्ति की नंदा ( १/६/११ ) तिथियाँ शुक्रवार को , भद्रा ( २/७/१२ )  तिथियाँ बुधवार को , जया ( ३/८/१३ ) तिथियाँ भौमवार को , रिक्ता ( ४/९/१४ ) तिथियाँ शनिवार को और पूर्णा ( ५/१०/१५ या ३० ) तिथियाँ गुरुवार को पड़ जाये तो कार्यो में सफलता प्राप्त कराने वाला सिद्ध योग होता है |

 

विशेष – चंद्रमा के पूर्ण और क्षीण होने से तिथियों में बलत्व और निर्बलत्व  होता है | अतः शुक्लपक्ष में प्रतिपदा से पंचमी तक चंद्रमा क्षीण होने के कारण प्रथमावृत्ति की नन्दादि तिथियाँ  अशुभ , षष्ठी से दशमी तक चन्द्रमा के मध्य ( न पूर्ण , न क्षीण ) होने से द्वितीया वृत्ति की नंदादि ( ६/७/८/९/१० )  तिथियाँ मध्य और इसी भांति तृतीया वृत्ति की नंदादि ( ११/१२/१३/१४ ) तिथियाँ चंद्रमा के पूर्ण होने के कारण शुभ कही गयी है  एवं कृष्ण पक्ष में १ – ५ तिथियाँ शुभ , ६ – १० तिथियाँ मध्य , ११ – ३० तक की तिथियाँ चंद्रमा के क्षीण होने के कारण अशुभ मानी गयी है | स्पष्ट ज्ञान हेतु चक्र देखिये —

 

तिथिसंज्ञा  प्रथमावृत्ति  द्वितीयावृत्ति  तृतीयावृत्ति  वार  योग 
नंदा  १  ६  ११  शुक्र   
भद्रा  २  ७  १२  बुध   
जया  ३  ८  १३  भौम , मंगल  सिद्धियोग 
रिक्ता  ४  ९  १४  शनि   
पूर्णा  ५  १०  १५ , ३०  गुरु   
शुक्ल पक्ष में  अशुभ  मध्य  शुभ  चन्द्र पूर्व  निर्बल पश्चात सबल 
कृष्ण पक्ष में  शुभ  मध्य  अशुभ  चन्द्र पूर्व  सबल पश्चात सबल 

 

 

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