Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

News & Update

कुंडली रिपोर्ट , शनि रिपोर्ट , करियर रिपोर्ट , आर्थिक रिपोर्ट जैसी रिपोर्ट पाए और घर बैठे जाने अपना भाग्य अभी आर्डर करे
❣️❣️ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।❣️❣️ ज्योतिष: वेद चक्षु नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिव तराय च नमः।।>

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

January 28, 2023 14:07
Omasttro

सुकेश के पुत्रो द्वारा सताये गये देवताओं की ओर से विष्णुजी का कुपित हो उन्हें मरने जाना

 
 
     उन राक्षसों से पीड़ित होकर देवता, ऋषि और तपस्वी भय से व्याकुल हो देवदेव महादेव की शरण में गये | वहाँ जाकर उन्होंने तिपुरमर्दक कामारि शिवजी को प्रणाम किया और भय से कम्पित वाणी द्वारा यह निवेदन किया कि-‘हें भगवन! हें प्रजाध्यक्ष! ब्रह्माजी के वर से धृष्ट हो सुकेश के पुत्र सम्पूर्ण प्रजा को बडा  कष्ट दे रहे हैं | 
 
     हमारे शरणदाता आश्रम को उन्होंने उजाड दिया जो अब वास करने योग्य नही रह गया | देवताओं को स्वर्ग से हटाकर वे स्वयं ही अधिकार कर लिये तथा देवताओं के समान ही अब वे तीनों राक्षस स्वर्ग में विहार करते हैं माली, सुमाली और माल्यवान-ये तीनों राक्षस कहते हैं कि-‘विष्णु, रूद्र, ब्रह्मा, इन्द्र, यम, वरुण और सूर्य मैं ही हूँ | 
 
     अब तो उन दुर्धर्ष और अहंकारी राक्षसों के साथ रहना हमारे लिये बड़ा कठिन हो गया हैं; क्योंकि वे हम सबको बड़ा कष्ट दे रहे हैं | हें प्रभो! हम आपकी शरण आये हैं | उनका नाश कर, हमें अभय कीजिए |’ तब उन समस्त देवताओं की इस प्रार्थना को सुनकर कपर्दी, नीललोहित महादेवजी ने कहा-देवताओं! मैं तो उन राक्षसों को न मारूंगा | क्योंकि मुझसे तो वे अवध्य हैं | परन्तु मैं तुम्हे वह उपाय बतलाता हूँ कि, उन्हें कौन मार सकेगा | हें महर्षियों! तुम लोग इसी प्रकार देवताओं सहित भगवान विष्णु की शरण में जाओ, वे उनका नाश कर डालेंगे |
 
     भगवान शिवजी के ऐसा कहने पर देवता उनकी जय-जयकार कर निशाचरों के भय से पीड़ित हो विष्णुजी के पास गये | वहाँ जाकर उन्होंने शंख, चक्र, गदाधारी देवनारायण के चरणों में प्रणाम किया और व्याकुलता से कहा कि-‘हें देव! सुकेश के तीनों पुत्रों ने वरदान की शक्ति से आक्रमण करके हमारे स्थान हरण कर लिये हैं | त्रिकूट पर्वत के शिखर पर लंका नाम की जो दुर्गम नगरी हैं, वहीँ रहकर वे निशिचर हम सब देवताओं को क्लेश दे रहे है | हें मधुसूदन! हमारे हितार्थ आप उनका संहार करें, हम सब आपकी शरण आये हैं | आप हमारी रक्षा करें | 
 
     आपके अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं हैं जो हमारी रक्षा करें | राक्षस मद से मतवाले हो रहे हैं | अत: आप अपने चक्र से उनका शिर काटकर हमें अभय कीजिये | देवतों के इस प्रकार के निवेदन को सुनकर देवाधिदेव जनार्दन उन्हें अभय देते हुए बोले-‘शिव से श्रापित राक्षस सुकेश को मैं जनता हूँ तथा उसके पुत्रो को भी जिनमे माल्यवान श्रेष्ठ हैं, मैं अपरिचित नहीं हूँ | वे अवश्य ही धर्म की मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं |
 
     मैं उनका नाश करूँगा | तुम बीएस चिंता त्याग दो |’ समर्थ विष्णु से ऐसा आश्वासन पाकर देवता उनकी जय-जयकार करते हुए अपने-अपने स्थान को चले आये | जब इसका समाचार माल्यवान को प्राप्त हुआ, तब उसने अपने दोनों भाईयों को बुलाकर विष्णुजी के कुपित होने की सब बात कह सुनाई और कहा कि अब इस विषय में हम लोग भी उचित कार्यवाही करें; क्योंकि हिरण्यकशिपु तथा अन्य देवद्रोही दैत्यों को इन्ही विष्णु ने मारा हैं | नमुची, कालनेमि, संहाद, राधेय, यमलार्जुन, हर्दिक्य, शुम्भ और निशुम्भ आदि बड़े-बड़े बलवान और शक्तिशाली असुर इन्ही के हाथ से मारे गये हैं | अब वही नारायण हमें भी मारना चाहते हैं |
 
     अत: हम सब भी कोई उचित उपाय करें | तब ज्येष्ठ भ्राता माल्यवान की यह बात सुनकर सुमाली और माली ने कहा-‘भाई! हम लोगों ने स्वाध्याय, दान और यज्ञ किये हैं | एश्वर्य की रक्षा तथा उसका उपयोग भी किया हैं | हमने आरोग्यपद जीवन पाया हैं तथा अपनी कुल-परम्परागत हमने धर्म की स्थापना की हैं | हमने देवसेना रुपी अगाध सागर में प्रवेश करके बड़े-से-बड़े शत्रु पर भी विजय प्राप्त की हैं | अत: हम लोगो को मृत्यु से कोई भय नहीं हैं | नारायण, रूद्र, इन्द्र या यमराज कोई भी क्यों न हो, हमारे समक्ष भयातुर हैं |
 
     परन्तु विष्णुजी हम पर क्यों कुपित हैं इसका कोई कारण नहीं ज्ञात होता | सम्भवत: देवताओं के ही उत्तेजन से उनका मन हमारी ओर से विपरीत हो गया हैं | अतएव हम सब एकत्र होकर आज ही सब देवताओं का वध कर डालें-यह उचित हैं | क्योंकि उन्ही के कारण यह उपद्रव उपस्थित हुआ |’ ऐसा विचार कर उन महाबली निशाचरों ने उद्धोद्योग ई घोषणा कर दी | राक्षसों की सब सेना एकत्र होने लगी | रथ, हाथी, घोड़े, गधे, बैल, ऊंट, गरुड़ के समान पक्षी, सिंह, बाघ, सूअर और नीलगाय आदि वाहनों पर वे बलोंमत्त निशाचर लंका छोडकर देवलोक को छल दिये | उस समय पृथ्वी और आकाश में भयंकर उत्पात प्रकट हुए | सम्पूर्ण भूतों का लय-सा होता दिखाई पड़ा |
 
     गीधों का समूह राक्षसों पर काल सदृश मंडराने लगा | फिर भी वे कालपाशबद्ध राक्षस नहीं लौटे | और बढते ही चले गये | जब देवदूतों ने राक्षसों के इस उद्योग का समाचार विष्णुजी से कहा, तब वह तत्क्षण ही सहस्र सूर्य के समान चमचमाता कवच धारण कर, बाणों से पूर्ण दो तरकस लिये, कटिसूत्र धारण किये हुए, प्रदीप्त खड्ग उठा अपने वहाँ गरुड़ पर जा बैठे और इनके अतिरिक्त उन्होंने पाञ्चजन्य शंख, सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा, नंदकी खड्ग और शार्ङ्गधनुष इस प्रकार सभी श्रेष्ठ आयुधों को उन्होंने ग्रहण कर लिया |
 
     फिर तो श्याम स्वरूप, पीताम्बर पहने और गरुड़ की पीठ पर सवार, श्रीनारायण सुमेरु पर्वत स्थित विद्युत मेघ के समान शोभित होते हुए राक्षसों के संहारार्थ वहां जा पहुंचे | उस समय सिद्ध, देवर्षि, महानाग, गन्धर्व और यक्ष उनकी स्तुति करने लगे |
error: Content is protected !!
Join Omasttro
Scan the code

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

आपका हार्दिक स्वागत करता है ,

ॐ एस्ट्रो से अभी जुड़े 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.
%d bloggers like this: