हमें इस धरती पर रहते हुए अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए धन की जरूरत होती है और धन-धान्य का सुख मां लक्ष्मी की कृपा से प्राप्त होता है. ऐसे में मां लक्ष्मी की साधना-आराधना करने उन्हें प्रसन्न करने के दिन आ रहा है. दीपावली, जो कि अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व माना जाता है. इस दिन माँ लक्ष्मी की पूरे नियम के साथ पूजा की जाती है. हिन्दू धर्म में मान्यता है कि दीपावली पर्व पर सच्चे मन से माता लक्ष्मी की साधना-आराधना करने से पूरे साल आर्थिक मजबूती बनी रहती हैं.

इतना है नहीं मां लक्ष्मी की कृपा से धन का भंडार भी घरों में भरा रहता है. इसके साथ ही सभी तरह के सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही दीपावली के दिन ही ऋद्धि-सिद्धि के दाता और प्रथम पूजनीय माने जाने वाले गणपति की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है, गणेश जी की कृपा से पूरे साल जीवन में सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं. इसी वजह से हर कोई साल भर सुख और समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी के साथ विशेष रूप से गणपति का विधि-विधान से पूजा करता है.

दिवाली पर इन देवी-देवताओं का होता है विशेष पूजन
इसके साथ ही दीपावली के पावन पर्व पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ धन के देवता कुबेर, माता काली और मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है. मगर आपने कभी सोचा है इन सभी के लिए की जाने वाली विशेष पूजा के साथ भगवान विष्णु की पूजा क्यों नहीं की जाती है. यह सवाल काफी बड़ा है जो अक्सर कई लोगो ने मन में आता है. मगर उन्हें इसका जवाब नहीं मिल पाता है.

क्योंकि भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी को लोग पूरे विधि-विधान से पूजते हैं. मगर विष्णु जी को नहीं. हम आपको बताते है आखिर क्यों दीपावली पर माता लक्ष्मी को पूजा जाता है पर विष्णु जी को नहीं

जानें भगवान विष्णु के बगैर क्यों पूजी जाती हैं मां लक्ष्मी
तमाम देवी-देवताओं के साथ दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, उसी रात श्रीहरि भगवान विष्णु की पूजा नहीं की जाती है, क्योंकि दीपावली का पावन पर्व चातुर्मास के बीच आता है और इस समय भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन रहते हैं. इसी वजह से किसी भी धार्मिक कार्य में उनकी अनुपस्थिति स्वाभाविक है.

यही मात्र एक कारण है कि, दीपावली पर धन की देवी मां लक्ष्मी लोगों के घर में बगैर अपने स्वामी श्रीहरि भगवान विष्णु के बिना पधारती हैं.

वहीं गणेश जी की बात करे तो देवताओं में प्रथम पूजनीय माने जाने वाले गणपति उनके साथ अन्य देवताओं की तरफ से उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. हालांकि दीपावली के बाद जब भगवान विष्णु कार्तिक पूर्णिमा के दिन योगनिद्रा से उठ जाते हैं तो सभी देवता एक बार श्रीहरि के साथ मां लक्ष्मी का विशेष पूजन करके फिर से दीपावली मनाते है जिसे देव दीपावली कहा जाता है.

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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