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February 7, 2023 19:49
Omasttro

हिन्दू धर्म में हमें कई संस्कार सिखाये जाते है। हमारी संस्कृति के मूल में बसे हैं संस्कार। बड़ों को प्रणाम करना, नमस्ते करना या उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना। ऐसा करना हमारे घरों में बचपन से सिखाया जाता है। लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जिनमें हमें प्रणाम करने और चरण स्पर्श करने से बचना चाहिए।

ऐसे ना करें प्रणाम:

श्मशान से लौटते हुए व्यक्ति को प्रणाम करना वर्जित माना गया है। इसका कारण मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक है। श्मशान से लौटते समय व्यक्ति की मनोदशा सामान्य से अलग होती है।

जब कोई व्यक्ति ध्यान कर रहा हो तो उसे प्रणाम नहीं करना चाहिए। पूजा करते हुए व्यक्ति को भी प्रणाम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने के पीछे कारण यह है कि आपके प्रणाम करने से उसका ध्यान भंग होगा।

चरण स्पर्श करने का भी विधान है। ऐसे व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए, जो सो रहा हो। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, लेटे हुए व्यक्ति के पैर केवल एक ही स्थिति में स्पर्श किए जा सकते हैं, जब उसकी मृत्यु हो चुकी हो।

आज-कल एक चलन देखने को मिलता है। लोग अपने से बड़ों के पैर केवल एक हाथ से स्पर्श करते हैं। पैरों को शरीर की ऊर्जा का संग्रह माना जाता है। जब हम दोनों हाथों से बड़ों के पैर छूते हैं तो उ

नके दोनों पैर और हमारे हाथों को मिलाकर एक ऊर्जा चक्र पूरा होता है।

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