By -: Barkha Pandey

E-mail -: barkhapandeyastro@gmail.com

 



हमारे शरीर में विभिन्न कार्यों को कार्यान्वित करने के लिए अलग अलग प्राणशक्ति केंद्र है।

इन्हीं प्राण शक्ति केंद्र को हम चक्र कहते हैं। चक्र हमारे सूक्ष्म शरीर के अंदर रहते हुए पूरे ब्रह्मांड से ऊर्जा लेते हैं, उसे सोख लेते हैं और फिर हमारे शरीर में आवश्यकता अनुसार ऊर्जा की पूर्ति कर देते हैं।

भारतीय संस्कृति एवं वास्तुकला – डॉ. विजय कुमार


यह चक्र प्राण शक्ति के स्टोर हाउस होते है।

इन प्राण शक्ति को चक्र क्यों कहते हैं?
हमारे शरीर में तीन मुख्य नाड़ियां होती हैं ईडा, पिंगला और सुषुम्ना। जहां उड़ा और पिंगला नाड़ियां गोल गोल घूम कर ऊपर की ओर बढ़ती है वहीं सुषुम्ना बिल्कुल सीधा ऊपर की तरफ जाती है। हमारे शरीर में कई जगह ये तीनों नाड़ियां आपस में मिलती हैं। इन के मिलने के केंद्र को चक्र कहते हैं ‌। नाडी हमारे शरीर में मानसिक ऊर्जा को लेकर चलती है, जहां ये नाड़ियां मिलती है अर्थात चक्रों पर इन ऊर्जाओं का पुनः वितरण हो जाता है।

हमारे शरीर में हजारों चक्र होते हैं किन्तु ७ मुख्य चक्र होते हैं।

1. मूलाधार चक्र
2. स्वाधिष्ठान चक्र
3. मणिपुर चक्र
4. अनाहत चक्र
5. विशुद्धी चक्र
6 आज्ञा चक्र
7. सहस्त्रार चक्र।

अगला : चक्रों के गुण

 

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