अध्याय १ 

भाग २ 

वार 

 

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हमारे भारत वर्ष मे सूर्य उदय से लेकर अगले दिन सूर्य उदय के मध्य ( बीच ) का समय जो होता है , वार कहलाता है |

विशेष ध्यान दे -:  तारीख रात्री 12:00 के बाद बदल जाती है , परन्तु वैदिक ज्योतिष के अनुसार वार सूर्य उदय होने के बाद ही बदला हुआ माना जाता हे | 

सृष्टि के आरम्भ में सबसे पहले प्रतिदिन सूर्य दिखाई देता है , अतः पहली होरा का स्वामी सूर्य माना जाता है | इसके बाद अन्य होराओ के स्वामी क्रमशः – शुक्र , बुध , चंद्रमा , शनि , बृहस्पति ( गुरु ) तथा मंगल होते चले जाते है , अतः २४ चोबीस होरा बुध पर समाप्त होती है , 

अतः दुसरे दिन की पहली होरा चंद्रमा से शुरू होती है ,  प्रत्येक दिन का  इसी प्रकार का आगे कर्म रहता है 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी सूर्य होता है – उसे “रविवार” कहा जाता है | इसी प्रकार , 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी चन्द्र होता है – उसे “सोमवार” कहा जाता है | 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी मंगल होता है – उसे “मंगलवार” कहा जाता है | 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी बुध होता है – उसे “बुधवार” कहा जाता है | 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी गुरु ( बृहस्पति ) होता  है – उसे “गुरूवार” कहा जाता है | 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी शुक्र  होता है – उसे “शुक्रवार” कहा जाता है | 

जिस दिन की पहली  होरा का स्वामी शनि होता है – उसे “शनिवार ” कहा जाता है | 

वार  होते है एवं  वार  प्रकार के होते है |

१. क्रूर संज्ञक वार       २. सौम्य संज्ञक वार 

१ .  क्रूर संज्ञक वार -:  मंगल , शनि , रवि 

२ . सौम्य संज्ञक वार -: सोम , बुध , गुरु , शुक्र 

होरा 

“होरा” का प्रयोग घंटे के पर्याय में किया जाता है , – अर्थात – जिस प्रकार एक दिन-रात में २४ घंटे होते है , उसी प्रकार एक दिन-रात में २४ होराए होती है | 

प्रहर 

एक दिन-रात में ८ प्रहर होते है , एक प्रहर लगभग ८ घटी अथवा ३ तीन घंटे का होता है , चार प्रहर दिन के तथा चार प्रहर रात्री के माने जाते है , प्रहर को “याम” भी कहते है , एक प्रहर के आधे भाग को , जो प्रायः ४ घटी का होता है , “यामार्ध” कहते है , दिन-मान के घटने – बढ़ने से इसमें कुछ अंतर भी पद सकता हे |

 

One thought on “पंचांग ( अध्याय १ ) भाग २ वार + प्रहर + होरा”

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दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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