पंचांग अध्याय १  

भाग ३

 नक्षत्र 

नक्षत्र २७ होते है , ( अभिजित सहित २८ ) होते है , नक्षत्र से हमे व्यक्ति के जीवन के बारे में व समय के शुभ अशुभ का फैसला करते है , आइये इस लेख में आज हम पड़ेंगे नक्षत्रो के नाम व उनके स्वामी 

ध्यान दे –: नक्षत्रो के गुण-स्वभाव अपने स्वामियों के गुण-स्वभाव के अनुसार ही होते है ||

क्रमांक  नक्षत्र  स्वामी 
अश्विनी अश्विनी कुमार
भरणी काल ( यमराज )
कृतिका अग्नि
रोहिणी ब्रह्मा
मृगशिरा चंद्रमा
आर्द्रा रूद्र ( शिव )
पुनर्वसु अदिति
पुष्य बृहस्पति
अश्लेषा सर्प
१० मघा पितर
११ पूर्वा फाल्गुनी भग
१२ उत्तर फाल्गुनी अर्य्यम
१३ हस्त अर्क ( सूर्य )
१४ चित्रा विश्वकर्मा
१५ स्वाति वायु
१६ विशाखा इन्द्र – अग्नि
१७ अनुराधा मित्र
१८ ज्येष्ठा इंद्र
१९ मूल राक्षस
२० पूर्वाषाढ़ा जल
२१ उत्तराषाढ़ा विश्वेदेव
२२ अभिजीत विधि ( ब्रह्मा )
२३ श्रवण विष्णु
२४ धनिष्ठा वासु
२५ शतभिषा वरुण
२६ पूर्वाभाद्रपद अजैकपाद
२७ उत्तरा भाद्र्पद अहिर्बुधन्य
२८ रेवती पूषा

  

प्रत्येक नक्षत्र ४ चरण में बाटे गए है , और ९ चरण की १ राशि हे , अगली कक्षा में चरण के बारे में जानेगे ||   

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
ॐ एस्ट्रो के सभी पाठको को शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाये ||

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