पंचांग ( अध्याय १ ) 
भाग ४ 
नक्षत्र के चरण

पिछले भाग में आपने जानना था नक्षत्र के नाम  व उनके स्वामी 

इस भाग में आप जानेंगे नक्षत्रो के चरण |
प्रत्येक नक्षत्र को चार – चार भागो में बाटा गया है , नक्षत्र के प्रत्येक भाग को ‘चरण’ कहा जाता है – प्रथम चरण , द्वितीय चरण , तृतीय चरण , चतुर्थ चरण |
इस प्रकार २७ नक्षत्रो के कुल १०८ भाग ( चरण ) होते है | क्रमशः ९ नक्षत्र चरणों की एक – एक ‘राशि’ होती है | इस प्रकार २७ नक्षत्रो से मिलकर १२ राशियाँ बनती है | 
‘अभिजित’ नक्षत्र के चारो चरण ‘मकर’ राशि में बढ़ जाते है , अतः इस राशि में १३ नक्षत्र चरण होते है |
नक्षत्रो के चरणाक्षर 
नक्षत्र  प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ 
अश्विनी चू चे चो ला
भरणी ली लू ले लो
कृतिका
रोहिणी वा वी वू
मृगशिरा वे वो का की
आर्द्रा कु
पुनर्वसु के को हा ही
पुष्य हू हे हो डा
अश्लेषा डी डू डे डो
मघा मा मी मू मे
पूर्वा फाल्गुनी मो टा टी टू
उत्तर फाल्गुनी टे टो पा पी
हस्त पू
चित्रा पे पो रा री
स्वाति रु रे रो ता
विशाखा ती तू ते तो
अनुराधा ना नी नू ने
ज्येष्ठा नो या यी यू
मूल ये यो भा भी
पूर्वाषाढ़ा भू
उत्तराषाढ़ा भे भो जा जी
अभिजीत जू जे जो खा
श्रवण खी खू खे खो
धनिष्ठा गा गी गू गे
शतभिषा गो सा सी सू
पूर्वाभाद्रपद से सो दा दी
उत्तरा भाद्र्पद दू ञ 
रेवती दे दो चा ची

  

प्रत्येक नक्षत्र ४ चरण में बाटे गए है , और ९ चरण की १ राशि हे , अगली कक्षा में चरण के बारे में जानेगे ||   

 

ध्यान दे -:  किसी व्यक्ति का जन्म जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है , उसके नाम के आदि ( प्रारंभ ) में उसी नक्षत्र का चरण रखा जाता हे |   

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