धर्म , आस्था , श्रद्धा का बिना मिलावट वाला स्वरूप देखना हो तो इस 118 किलोमीटर की पैदल यात्रा 25 से 30 अप्रेल 2022 में शामिल होकर देखिए । भीषण गर्मी में भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक है पंचक्रोशी यात्रा , उज्जैन महाकाल की नगरी की । आज भी सनातन धर्म ग्रामीण लोगों में ही मूल रूप से जीवित है ।
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माधवाय नमः
स्कंदपुराण का कथन है-
‘न माधवसमोमासोन कृतेनयुगंसम्‌।

अर्थात् वैशाख के समान कोई मास नहीं, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं, गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं। भगवान विष्णु को अत्याधिक प्रिय होने के कारण ही वैशाख उनके नाम माधव से जाना जाता है। जिस प्रकार सूर्य के उदित होने पर अंधकार नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार वैशाख में श्रीहरि की उपासना से ज्ञानोदय होने पर पर अज्ञान का नाश होता है।इस मास में जल दान, कुंभ दान का विशेष महत्व है।

पंचागीय गणना के अुनसार पंचक्रोशी यात्रा वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की दशमी से प्रारंभ मानी जाती है। इस अनुसार पंचक्रोशी यात्रा 25 अप्रैल को प्रारंभ होना चाहिए, लेकिन हर बार की तरह ग्रामीण सर पर पोटली रखे , कड़ी धूप में पैदल ही समय से पहले ही यात्रा पर चल पड़ेंगे देख लीजिएगा भारत देश के मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में।

पंचक्रोशी यात्रा समापन 30 अप्रैल को शनिश्चरी अमावस्या पर हो रहा है। इस दिन इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर तथा शिप्रा स्नान के लिए रामघाट पर हजारों श्रद्घालु आएंगे।

# नागचंद्रेश्वर से बल लेकर शुरू होती है यात्रा

पंचक्रोशी यात्रा पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर से होता है। यात्रा पर जाने वाले श्रद्घालु भगवान नागंचद्रेश्वर को श्रीफल अर्पित कर उनसे बल प्राप्त करते हैं। अमावस्या पर यात्रा संपन्न होने के बाद यात्री भगवान को मिट्टी के अश्व (घोड़े) अर्पित कर बल लौटाने के बाद गंतव्य की ओर रवाना होते हैं।

हज़ारों की संख्या में अपने परिवार के साथ गाव के गाव अपने खाने -पीने , ओड़ने -बिछाने , नहाने -धोने का सामान एक पोटली में बाँध उसे अपने सर पर रख कर घर से निकल पड़ते है ।

न तो उन्हें कोई आमंत्रित करता है ओर न उन्हें कोई सुविधा , सुख चाहिए रहने , खाने , ठहरने को । वो तो अपने ईश्वर , शिव , देव में अटूट श्रद्धा से निकल पड़ते है। ओर दिन भर मंदिर दर्शन , पूजन करके रात में कही भी गाँव , सड़क किनारे जंगल में अपना डेरा डाल कर रात का भोजन बनाते है , खाते है ओर रात भर भजन कीर्तन करते है ।

सुबह भोर होते ही स्नान ध्यान करके वो अगले पड़ाव की ओर निकल पड़ते है । न वो किसी से कोई सुविधा माँगते है न वो तकलीफ़ों का रोना रोते है । न किसी की शिकायत किसी से करते है । पूछो तो बोलते है राम जी की यात्रा में सब राम जी की मौज है ।
वो तो कठिन परिस्थिति में भी अपने ईश्वर को धन्यवाद दे उनके दर्शन कर आगे बड़ते जाते है हर पड़ाव के बाद रोज़ ।

# चार द्वारपालों के दर्शन पूजन की मान्यता

उज्जयिनी के चार द्वार पर चार द्वारपाल हैं।
शिवलिंग रूप में विराजित पिंग्लेश्वर, दुर्दुदेश्वर, कायावरुणेश्वर तथा बिलकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान का अभिषेक पूजन किया जाता है। इसलिए प्रतिवर्ष हजारों यात्रा 118 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर इन मंदिरों में दर्शन पूजन करते हैं।

पंचक्रोशी यात्रा 118 किलोमीटर तक निकाली जाती है और इसमें कुल नौ पड़ाव व उप पड़ाव आते हैं। इन पड़ावों व उप पड़ावों के बीच कम से कम छह से लेकर 23 किलोमीटर तक की दूरी है।

पंचक्रोशी यात्रा उज्जैन की प्रसिद्ध यात्रा है। इस यात्रा में आने वाले देव- 1. पिंगलेश्वर, 2 कायावरोहणेश्वर, 3. विल्वेश्वर, 4. दुर्धरेश्वर, 5. नीलकंठेश्वर हैं।
वैशाख मास तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ होते ही शिवालयों में गलंतिका बंधन होता है। इस समय पंचेशानी यात्रा (पंचक्रोशी यात्रा) शुरू होती है।

इस ग्रामीण ओर अब तो शहरी सनातन धर्म में श्रद्धा की इस कठिन पंचक्रोशी यात्रा में एक बार ज़रूर आइए ओर ख़ुद महसूस कीजिए की ईश्वर की सच्ची आराधना किसी भी सुविधा , सुख में नही । वो तो मन की मौज में है । तभी तो कहते है भगवान भक्त के निर्मल भाव में ही मिलते है । ढोंग में केवल वो भगवान की मूरत का दर्शन ही कर सकते है । एक बार आइए तो सही दुनिया की सबसे कठिन ओर भक्ति से सराबोर यात्रा के ख़ुद साक्षी बने ।
महाकाल बाबा साक्षात आपको आशीष देंगे सच जानिएगा ।

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