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January 28, 2023 15:54
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राक्षसों का पूर्व इतिहास तथा उन्हें महादेव-पार्वती का वरदान

 
     अगस्त्यजी के कहे हुए इस वृत्तान्त को सुनकर श्रीराम विस्मित हो गये | उन्होंने बारम्बार शिर कम्पितकर अगस्त्यजी की ओर देखते हुए पूछा-हें भगवन! आपसे यह सुनकर कि लंका में पहले ही से राक्षस रहते थे’ नुझे बड़ा आश्चर्य हुआ | क्या वे राक्षस रावण, कुम्भकर्ण आदि से भी बढ़कर बली थे ? हें ब्रह्मन! उनके मूल पूर्वज कौन थे और उनका क्या नाम था | विष्णु से उनका क्या बैर था कि उन्होंने उन्हें मार भगाया ? 
 
     तब राम के ऐसा पूछने पर अगस्त्यजी बोले-हें राम! ब्रह्माजी ने पहले जल की सृष्टि की और उसकी रक्षार्थ अनेक प्राणियों को उन्होंने उत्पन्न किया | उनमे हेति और प्रेहित नाम के दो राक्षस थे | वे दोनों भ्राता मधु-कैटभ के समान ही वीर थे | उनमे प्रहित बड़ा धार्मिक था, जो तपोवन में जाकर तप करने लगा और हेति ने विवाह के लिए बड़ा यत्न किया | उस समय काल एक बहन थी जिसका नाम ‘भया’ था | अभी वह कुमारी ही थी कि उसका रूप अति भयंकर हो गया | हेति ने उसी भया के साथ विवाह किया | उससे एक पुत्र हुआ जिसका नाम विद्युत्केश था | 
 
     उसका विवाह संध्या की पुत्री से हुआ, जिसका नाम सालकटङ्कटा था | उसे पाकर निशाचर विद्युत्केश बड़ा प्रसन्न हुआ और सुख से रहने लगा | कुछ काल पश्चात उस संध्या पुत्री ने विद्युत्केश से गर्भ धारण किया और मन्दराचल पर जाकर वहाँ एक पुत्र प्रसव किया और उस नवजात शिशु को वहीँ त्याग फिर विश्युत्केश के पास चली आयी | इधर उसका वह त्यागा हुआ पुत्र मेघ की भांति शब्द करने लगा | फिर मुँह में मुट्ठी डालकर धीरे-धीरे रोने लगा | उसी समय वृषभारुढ शिव-पार्वती आकाश मार्ग से उधर होकर कही जा रहे थे |
 
     उन्होंने उस बालक के रोने का शब्द सुना | जब निकट जाकर देखा तो पार्वतीजी को बड़ी दया आई | उन्होंने उनके कहने से उस राक्षस-पुत्र का वय उसकी माता के समान कर दिया और उसे अमरत्व भी प्रदान कर दिया | महादेव जी के लिए ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं थी | क्योंकि वे अक्षर और अविनाशी हैं | महादेवजी ने पार्वतीजी को प्रसन्न करने के लिए एक पुर के समान एक विमान भी दे दिया और हें नृपात्मज! पार्वतीजी ने राक्षसियों को यह भी वर दे दिया कि ‘राक्षसियाँ गर्भ धारण करते ही शिशु उत्पन्न करे और वह तत्क्षण माता की आयु का हो जाया करे | 
 
     हें राम! फिर तो वह विद्युत्केश का पुत्र सुकेश के नाम से प्रसिद्ध हुआ और महादेवजी के वरदान से वह बड़ा अभिमानी हो गया | अब आकाशचारी यान ( विमान ) और लक्ष्मी को प्राप्त कर वह सर्वत्र विचरण करने लगा | 
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