चांडाल दोष निवारण पूजन

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चांडाल दोष निवारण पूजन

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वैदिक ज्योतिष अनुसार जिस जातक की जन्म कुंडली में गुरु बृहस्पति और राहु का किसी भी तरह का संबंध बनता है तो, उस स्थिति में कुंडली में गुरु चांडाल दोष का निर्माण होता है। इस कारण छाया ग्रह राहु के प्रभाव में आने से गुरु भी जातक को अशुभ फल देने लगता है। यही कारण है कि चांडाल दोष को साढ़ेसाती, कालसर्प दोष और मंगल दोष से भी अधिक अशुभ माना गया है। क्योंकि इस दोष के नकारत्मक प्रभाव से जातक षड्यंत्र रचता है और वे अनैतिक व्यवहार अपनाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसका रुझान अपने जीवनसाथी से अलग किसी अन्य विपरीत लिंगी व्यक्ति की ओर आकृषित रहता है, जिससे उसका चारित्रिक पतन होना निश्चित होता है।

Description

चांडाल दोष निवारण पूजा

वैदिक ज्योतिष अनुसार जिस जातक की जन्म कुंडली में गुरु बृहस्पति और राहु का किसी भी तरह का संबंध बनता है तो, उस स्थिति में कुंडली में गुरु चांडाल दोष का निर्माण होता है। इस कारण छाया ग्रह राहु के प्रभाव में आने से गुरु भी जातक को अशुभ फल देने लगता है। यही कारण है कि चांडाल दोष को साढ़ेसाती, कालसर्प दोष और मंगल दोष से भी अधिक अशुभ माना गया है। क्योंकि इस दोष के नकारत्मक प्रभाव से जातक षड्यंत्र रचता है और वे अनैतिक व्यवहार अपनाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसका रुझान अपने जीवनसाथी से अलग किसी अन्य विपरीत लिंगी व्यक्ति की ओर आकृषित रहता है, जिससे उसका चारित्रिक पतन होना निश्चित होता है। इसके अलावा कुंडली में राहु भी अशुभ फल देते हुए जातक में चोरी, जुआ, सट्टा, अनैतिक तरीके से धन अर्जन की प्रवृत्ति, मद्यपान सहित हिंसक व्यवहार आदि प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने का कार्य भी करते हैं। ऐसे में व्यक्ति को इन सभी समस्याओं से बचाने और उसकी कुंडली में निर्मित इस दोष को नष्ट व कम करने के लिए, चांडाल दोष निवारण पूजा सबसे कारगर व असरदार विकल्प सिद्ध होती है। ये पूजन-अनुष्ठान किसी विद्वान या योग्य पंडित द्वारा एक दिन में संपन्न किया जाता है।

पूजा की संपूर्ण जानकारी और विधि

 योग्य व कर्मकांडी ब्राह्मण करते हैं मार्गदर्शन

एस्ट्रोसेज के वरिष्ठ पुरोहित, आचार्य सुनील बरमोला के नेतृत्व में सभी पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। हमारे प्रतिष्ठित ज्योतिषी आचार्य सुनील बरमोला, अपनी विद्या की मदद से जन कल्याण का कार्य करते हुए जातकों के दुखों, कष्टों और समस्याओं का निवारण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देव नगरी उत्तराखंड के ऋषिकेश में पले-बढ़े और गुरुकुल के कठिन नियम-कानूनों का पालन करते हुए, उन्होंने अपनी 5वीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरे वेदांग का अध्ययन करते हुए की है और फिर अंततः उन्होंने वैदिक ज्योतिष में अपना योगदान देते हुए सामाजिक कार्यों के लिए ज्योतिष का विकल्प चुना। इस कर्म में उन्होंने सबसे प्रतिष्ठित श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ से आचार्य की डिग्री प्राप्त की।

 विस्तृत पूजा विधि

किसी भी पूजा की शुरुआत वैदिक मंत्रों के उच्चारण व जप के साथ होती है। पूजा में “होमा” (हवन) अनुष्ठान भी शामिल है जिसमें घी, तिल, जौ और अन्य पवित्र सामग्री व मंत्र का पाठ करते हुए, अग्नि को अर्पित की जाती है। जातक को इस पूजा से सर्वश्रेष्ठ लाभ देते हुए, उसकी समस्या को दूर करने के लिए यज्ञ एक महत्वपूर्ण उपाय होता है। अधिकतम सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए, वैदिक पूजा सबसे अच्छे मुहूर्त, नक्षत्र के दिन करनी चाहिए। शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा को पूरा करने के लिए, एक पुजारी यानी एक पंडित जी को नियुक्त किया जाता है, जो समय अनुसार पूजा को संपन्न करते हैं ।

 पूजा के लाभ

  • वैदिक ज्योतिष अनुसार पूजा करने से जीवन में समृद्धि आती हैं।
  • पूजा कराने से जातक को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
  • जातक के व्यवहार में सकारात्मकता आती है।
  • जीवन में प्रसिद्ध , मान्यता और मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  • घर के सदस्यों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • यह पूजा अथवा अनुष्ठान कराने से आपके महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हैं।
  • इस पूजा के प्रभाव से आपके वो सभी कार्य जो रुके हुए थे, वो पूरे हो जाते हैं।
  • शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं।
  • नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है।

 

 पूजा-अनुष्ठान में होता है चमत्कारी वैदिक मंत्रों का उच्चारण

पूजा-अनुष्ठानों के दौरान पारंपरिक वैदिक मंत्रों का जप, जातकों के लिए बहुत महत्व रखता है। इस जप से ही मन, आत्मा और ऊर्जा को शुद्ध करने में मदद मिलती है, जिससे जातक मानसिक शक्ति और कौशल को पुनः प्राप्त करने में सक्षम होता है। इन वैदिक मंत्रों के जप से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा से वातावरण में शांति और समृद्धि आती है, जिससे सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलती हैं। पूजा-पाठ के दौरान उससे संबंधित मंत्रों का जाप ही जातक को आध्यात्मिक जागृति की ओर ले जाता है और उसे देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलना सुनिश्चित होता है। साथ ही मंत्रों की मदद से ही जातक को पूजा से शुभाशुभ परिणाम और आशीर्वाद के लिए देवी-देवताओं को प्रसन्न करने में भी मदद मिलती है।

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