काल सर्प दोष

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काल सर्प दोष

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कालसर्प दोष पूजा

कुंडली में राहु और केतु के विशेष स्थिति में होने पर कालसर्प योग बनता है। कालसर्प दोष के बारे में कहा गया है कि यह जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या श्राप के फलस्वरूप, उसकी जन्मकुंडली में बनता है। यदि कुंडली के लग्न भाव में राहु विराजमान हो और सप्तम भाव में केतु ग्रह उपस्थित हो तथा बाकी ग्रह राहु-केतु के एक ओर स्थित हों तो, ऐसी स्थिति में कालसर्प दोष योग का निर्माण होता है।

Description

कालसर्प दोष का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय उत्पन्न होने लगता है। लोगों के बीच में ऐसी धारणा बन चुकी है कि कालसर्प दोष सदैव कष्टकारी ही होता है। लेकिन ये सच नहीं है। जन्म-कुंडली में विविध लग्नों व राशियों में स्थित ग्रह के भाव के आधार पर ही इस योग के अच्छे या बुरा होने का पता चलता है। कई लोगों के लिए काल सर्प योग वरदान साबित होता है। जानिए काल सर्प दोष के बारे में विस्तृत जानकारी…

 

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  • सबसे सटीक उपाय
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कालसर्प दोष पूजा

कुंडली में राहु और केतु के विशेष स्थिति में होने पर कालसर्प योग बनता है। कालसर्प दोष के बारे में कहा गया है कि यह जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या श्राप के फलस्वरूप, उसकी जन्मकुंडली में बनता है। यदि कुंडली के लग्न भाव में राहु विराजमान हो और सप्तम भाव में केतु ग्रह उपस्थित हो तथा बाकी ग्रह राहु-केतु के एक ओर स्थित हों तो, ऐसी स्थिति में कालसर्प दोष योग का निर्माण होता है।

 कालसर्प दोष के प्रभाव

कालसर्प दोष से प्रभावित जातक को सपने में सांप और पानी दिखाई देने के साथ-साथ, स्वयं को हवा में उड़ते देखना, कार्यों में बार-बार अड़चनें आना और साथ ही इनके विचारों में बार-बार बदलाव आते हैं और कोई भी काम करने से पहले मन में नकारात्‍मक विचार आने लगते हैं। इस दोष से पीड़ित जातक का मन पढ़ाई में नहीं लगता। ये भी देखा गया है कि इससे पीड़ित व्यक्ति नशे का आदि बन जाता है।

कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजा करने का विधान

कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजन की अनेक विधि हैं। सबसे उत्तम विधि वैदिक मंत्रों द्वारा किया जाने वाला विधान है। इस दौरान भगवान शिव की आराधना की जाती है। चूंकि भगवान शिव सर्पों को अपने गले में धारण करते हैं, इसलिए भगवान शिव जी की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जातक को अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

कालसर्प दोष की पूजा विधि

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कालसर्प दोष की पूजा एक दिन में किसी विशेषज्ञ पंडित या पुरोहित द्वारा संपन्न की जाती है और इसलिए यह पूजा आमतौर पर सोमवार के दिन से शुरू की जाती है। इस पूजा में विशेषकर नाग-नागिन का एक जोड़ा सोने या चांदी में बनाकर, उनका रुद्राभिषेक कर पूजन किया जाता है। किसी भी पूजा को संपन्न करने में, सबसे आवश्यक कार्य उस पूजा के लिए निर्दिष्ट मंत्र का पाठ करना होता है और यह जाप अधिकांश: 125,000 बार होता है। हालांकि कालसर्प दोष में श्री महामृत्युंजय जाप के अनुसार, आदर्श रूप से यथा संख्या जाप कर श्री महामृत्युंजय मंत्रों का जाप करते हुए, बाकी प्रक्रिया या विधि इस मंत्र के साथ ही बनाई जाती है। इस प्रकार, हमारे विशेषज्ञ पंडित जी या पुरोहित जी इस पूजा के आरंभ के दिन, एक विशेष संकल्प लेते हैं। अपने इस संकल्प में प्रमुख पंडित जी भगवान शिव के समक्ष शपथ लेते हैं कि वे और उनके अन्य सहायक पंडित एक निश्चित व्यक्ति के लिए यथा संख्या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने जा रहे हैं, जो जातक है और जिनका नाम, उनके पिता का नाम और उनके परिवार का नाम भी संकल्प में लिया जाता है।

कैसे बनता है काल सर्प दोष? जब कुंडली में राहु और केतु एक तरफ मौजूद होते हैं और बाकी सभी ग्रह इनके बीच में हों स्थित हों तब कालसर्प योग या दोष बनता है। ऐसा कहा जाता है कि जिनकी कुंडली में ऐसी स्थिति बनती है उन्हें जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन लोगों को सफलता पाने में देरी लगती है। काल सर्प योग 12 प्रकार के होते हैं जिनका अलग-अलग प्रभाव होता है। कई लोगों के जीवन में इस योग की वजह से अशांति मची रहती है।

सम्पर्क – : 

आचार्य ओमप्रकाश त्रिवेदी – 8349159668

पंडित सचिन शर्मा – 7489273585

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
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