नारायण बलि पूजन

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नारायण बलि पूजन

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  • नारायण बलि पूजन
    नारायण बलि पूजा के माध्यम से पाएं पूर्वज के श्राप से मुक्ति।
  • नारायण बलि पूजन के लाभ
    नारायण बलि पूजन से मिलता है संतान सुख और भूत-प्रेतों से हमेशा के लिए छुटकारा।
  • सबसे सटीक उपाय
    घर के किसी व्यक्ति की उनुचित घटनाओं से मृत्यु के कारण, परिवार को हर समस्याओं से बचाने के लिए नारायण बलि की पूजा है सबसे सटीक उपाय।

Description

नारायण बलि पूजन

क्या आपके या परिवार के किसी सदस्य के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती हैं? फिर चाहे उसके निवारण के लिए आप कितना भी समय और धन खर्च कर लें, लेकिन अगर बावजूद हर प्रयास के बाद भी आपको किसी भी काम में सफल नहीं मिलती है तो, ऐसे में जातक की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष का होना संभव है। इस दोष के निवारण हेतु जातक द्वारा नारायण बलि पूजन करना वैदिक ज्योतिष में सबसे कारगर व एकमात्र विकल्प माना गया है। ये पूजन व अनुष्ठान नारायण बलि को पूर्वज के श्राप से मुक्त करने के लिए किया जाता है। क्योंकि ये देखा गया है कि जिस परिवार के किसी सदस्य या पूर्वज का ठीक प्रकार से मृत्य पश्चात अंतिम संस्कार, पिंडदान और तर्पण नहीं हुआ होता, उनकी आगामी पीढ़ियों में पितृदोष उत्पन्न होता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति का संपूर्ण जीवन तब तक कष्टमय रहता है, जब तक कि पितरों के निमित्त नारायण बलि विधान न किया जाए। साथ ही प्रेत योनि से होने वाली पीड़ा को दूर करने के लिए भी नारायण बलि की पूजा की जाती है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य की किसी भी कारण जैसे: आत्महत्या, पानी में डूबने से, आग में जलने से, दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु हुई हो, ऐसी स्थिति में भी इस दोष का निर्माण होता है। ये पूजन-अनुष्ठान किसी विद्वान या योग्य पंडित द्वारा एक दिन में संपन्न की जाती है।

पूजा की संपूर्ण जानकारी और विधि

 योग्य व कर्मकांडी ब्राह्मण करते हैं मार्गदर्शन

एस्ट्रोसेज के वरिष्ठ पुरोहित, आचार्य सुनील बरमोला के नेतृत्व में सभी पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। हमारे प्रतिष्ठित ज्योतिषी आचार्य सुनील बरमोला, अपनी विद्या की मदद से जन कल्याण का कार्य करते हुए जातकों के दुखों, कष्टों और समस्याओं का निवारण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देव नगरी उत्तराखंड के ऋषिकेश में पले-बढ़े और गुरुकुल के कठिन नियम-कानूनों का पालन करते हुए, उन्होंने अपनी 5वीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरे वेदांग का अध्ययन करते हुए की है और फिर अंततः उन्होंने वैदिक ज्योतिष में अपना योगदान देते हुए सामाजिक कार्यों के लिए ज्योतिष का विकल्प चुना। इस कर्म में उन्होंने सबसे प्रतिष्ठित श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ से आचार्य की डिग्री प्राप्त की।

 विस्तृत पूजा विधि

किसी भी पूजा की शुरुआत वैदिक मंत्रों के उच्चारण व जप के साथ होती है। पूजा में “होमा” (हवन) अनुष्ठान भी शामिल है जिसमें घी, तिल, जौ और अन्य पवित्र सामग्री व मंत्र का पाठ करते हुए, अग्नि को अर्पित की जाती है। जातक को इस पूजा से सर्वश्रेष्ठ लाभ देते हुए, उसकी समस्या को दूर करने के लिए यज्ञ एक महत्वपूर्ण उपाय होता है। अधिकतम सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए, वैदिक पूजा सबसे अच्छे मुहूर्त, नक्षत्र के दिन करनी चाहिए। शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा को पूरा करने के लिए, एक पुजारी यानी एक पंडित जी को नियुक्त किया जाता है, जो समय अनुसार पूजा को संपन्न करते हैं ।

 पूजा के लाभ

  • वैदिक ज्योतिष अनुसार पूजा करने से जीवन में समृद्धि आती हैं।
  • पूजा कराने से जातक को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
  • जातक के व्यवहार में सकारात्मकता आती है।
  • जीवन में प्रसिद्ध , मान्यता और मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  • घर के सदस्यों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • यह पूजा अथवा अनुष्ठान कराने से आपके महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हैं।
  • इस पूजा के प्रभाव से आपके वो सभी कार्य जो रुके हुए थे, वो पूरे हो जाते हैं।
  • शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं।
  • नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है।

 

 पूजा-अनुष्ठान में होता है चमत्कारी वैदिक मंत्रों का उच्चारण

पूजा-अनुष्ठानों के दौरान पारंपरिक वैदिक मंत्रों का जप, जातकों के लिए बहुत महत्व रखता है। इस जप से ही मन, आत्मा और ऊर्जा को शुद्ध करने में मदद मिलती है, जिससे जातक मानसिक शक्ति और कौशल को पुनः प्राप्त करने में सक्षम होता है। इन वैदिक मंत्रों के जप से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा से वातावरण में शांति और समृद्धि आती है, जिससे सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलती हैं। पूजा-पाठ के दौरान उससे संबंधित मंत्रों का जाप ही जातक को आध्यात्मिक जागृति की ओर ले जाता है और उसे देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलना सुनिश्चित होता है। साथ ही मंत्रों की मदद से ही जातक को पूजा से शुभाशुभ परिणाम और आशीर्वाद के लिए देवी-देवताओं को प्रसन्न करने में भी मदद मिलती है।

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
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