नवग्रह पूजा

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नवग्रह पूजा

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  • नवग्रह पूजा
    जन्म कुंडली में मौजूद विभिन्न ग्रहों का अशुभ प्रभाव, जातक के जीवन में अनेक विपरीत समस्याओं का मुख्य कारण बनता है।
  • नवग्रह पूजन का महत्‍व
    विधि- विधान अनुसार नवग्रह पूजा कराने से, जातक के कई बिगड़ते कार्य सफल हो जाते हैं। साथ ही इस पूजा के प्रभाव से जातक को अपनी सभी शारीरिक और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
  • नवग्रह पूजन का लाभ
    नवग्रह पूजन व अनुष्ठान से कुंडली के सभी नौ ग्रहों को बली बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि किसी जातक की कुंडली में कोई ग्रह नीच का हो तो, उसके बुरे प्रभाव से भी बचाव
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नवग्रह पूजा

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा गया है कि ग्रहों के शुभ -अशुभ प्रभाव के कारण जीवन में अनेक तरह शुभ-अशुभ परिस्थितियां प्राप्त होती हैं। कहा गया है कि मानव जीवन में ग्रहों का प्रभाव इतना प्रभावशील होता है कि एक अच्छे खासे परिवार में पल रहा जातक भी, अपने ही हाथों से खुद को बर्बाद कर लेता है। परंतु यह सारा खेल जातक की जन्म कुंडली में बैठे अशुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण, उसके जीवन को नर्क बना सकता है।

पूजा की संपूर्ण जानकारी और विधि

 नवग्रह पूजन का महत्‍व

नवग्रहों यानी नौ ग्रहों को शांत करने के लिए नवग्रह पूजन ही एकमात्र समाधान है। मानव जीवन में जो भी अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है उसके पीछे ग्रहों की चाल एक बड़ा कारण है। इन तमाम उतार-चढ़ावों को रोकने के लिए और क्रोधित ग्रह को शांत करने के लिए धार्मिक व पौराणिक ग्रंथों में नवग्रह यानी जीवन को प्रभावित करने वाले समस्त 9 ग्रहों की पूजा करने का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राशियां 12 होती हैं और प्रत्येक राशि में प्रत्येक ग्रह अपनी गति से चलते हैं। इसे ग्रहों की चाल कहा जाता है। एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने पर भी अन्य राशियों पर उसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक जातक में प्रत्येक ग्रह के गुण भी पाए जाते हैं। जैसे सूर्य से स्वास्थ्य, चंद्र से सफलता तो मंगल समृद्धि प्रदान करता है। इसी तरह से हर ग्रह के अपने सूचक हैं, जो हमारे जीवन को कहीं ना कहीं प्रभावित करते हैं और पूजा अथवा अनुष्‍ठान कराने से हर पीड़ित जातक के महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हुए, उसके रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं। शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं भी दूर होती है। मंत्रोच्चारण के जरिये इन ग्रहों के प्रभाव को सकारात्मक बनाते हुए, उनकी सही स्थापना की जाती है। इस प्रक्रिया को नवग्रह पूजा या नवग्रह पूजन कहा जाता है।

 

 सूर्यादि नवग्रहों की पूजा में सर्वोपरि है वैदिक मंत्र

सूर्यादि नवग्रहों की पूजा उनके वैदिक मंत्रों के साथ पारंपरिक यथा संख्या मंत्र का पाठ करने के साथ षोडशोपचार चरणों के साथ की जाती है। पूजा में हवन और अन्य अनुष्ठान भी शामिल है, जिसमें घी, तिल, जौ और भगवान सूर्य से संबंधित अन्य पवित्र सामग्री व सूर्यादि संख्याओं का मंत्र का पाठ करते हुए अग्नि को अर्पित की जाएगी। जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए यज्ञ एक महत्वपूर्ण उपाय है। अधिकतम सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए, वैदिक पूजा सबसे अच्छे मुहूर्त और नक्षत्र अनुसार ही करनी चाहिए ।

 

 नवग्रह पूजन के लाभ

  • वैदिक ज्योतिष व धर्म ग्रंथों के अनुसार नवग्रह पूजन से कोई एक ग्रह नहीं, बल्कि पूरे नौ ग्रह प्रसन्न होते हैं और आपको एक साथ नौ ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है।
  • घर परिवार में सुख शांति व हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति के लिए नवग्रहों की पूजा कर सकते हैं।
  • अगर आपकी कुंडली में कोई ग्रह नीच या अशुभ स्थान में होकर बुरा प्रभाव डाल रहा है और इसके कारण आपके जीवन में अनेक कठिनाइयां आ रही है तो, आपको नवग्रह पूजन अवश्य कराना चाहिए।
  • नवग्रह पूजन की सबसे खास बात यह है कि इसे कोई भी करवा सकता है। इस पूजन से आपकी कुंडली के सभी दोष शांत होते हैं।

 

 नवग्रहों की दशा-चाल का प्रभाव

प्रमाणित रूप से ग्रहों की दशा-चाल का प्रभाव जातक के ऊपर पड़ता है। इस स्थिति की जानकारी जातक की जन्म तिथि, जन्म स्थान एवं जन्म के समय अनुसार उसकी कुंडली बनाकर की जाती है, जिसमें सभी 9 ग्रहों की दशा का विवरण होता है और उसी के अनुसार यह अनुमान लगाया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा रहेगा। यदि जातक की कुंडली में किसी प्रकार का ग्रह दोष होता है तो, वह उसे प्रभावित करता है और व्यक्ति के जीवन में विपरीत परिस्थितियां पैदा करता है। जिस कारण व्यक्ति का आत्मबल टूटने लगता है और उसका जीवन तनाव और चिंताओं से घिर जाता है। ज्योतिष शास्त्र में राहु, केतु को मिलाकर कुल 9 ग्रह यानी सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु माने गये हैं । इन सभी ग्रहों के गुणों का समावेश प्रत्येक जातक की जन्मकुंडली में मिलता है। यदि किसी जातक का कोई ग्रह कमजोर हो या दशा अनुसार उनका विपरीत प्रभाव जातक पर पड़ रहा हो तो, उन्हें शांत करने के उपाय भी ज्योतिष शास्त्र द्वारा दिए जाते हैं।

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