वैदिक ज्योतिष में समस्त सभी ग्रहों का प्रभाव किसी न किसी रूप से सभी राशियों पर आवश्यक ही पड़ता है। ज्योतिष विज्ञान में यूँ तो 9 ग्रहों का उल्लेख मिलता है, जिसमें से राहु और केतु अकेले ऐसे ग्रह हैं जो छायाग्रह कहलाते हैं। इनका प्रभाव व हर स्थानपरिवर्तन मानव जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।

राहु का किसी कुंडली में कमज़ोर होना जातक की न केवल रातों की नींद उड़ा सकता है, बल्कि उसे पल भर में ही राजा से रंक तक बना सकता है। इसलिए राहु-केतु के प्रभाव और दशा का ज्योतिष में विशेष महत्व होता है।

 

आज हम बात करेंगे इन्हीं छायाग्रह राहु-केतु में से राहु की दशा के बारे में। जिसका नकारात्मक प्रभाव हर जातक के जीवन में उथल-पुथल मचाने का दम रखता है। शायद इसलिए ही हिन्दू पंचांग अनुसार राहु काल में हर प्रकार के शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। क्योंकि इस दौरान किये जाने वाले कार्य विफल हो जाते हैं और उनसे व्यक्ति को केवल और केवल अशुभ फल की प्राप्ति होती है। एस्ट्रोसेज के ज्योतिषयों के अनुसार कुंडली में स्थित सभी 12 भावों पर राहु का प्रभाव विभिन्न-विभिन्न रूप से पड़ता है। आज हम आपको इस लेख में राहु की दशा से मिलने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार पूर्वक बताएंगे। साथ ही उनसे बचने हेतु कुछ उपाय भी सुझाएंगे।

 

कुंडली में राहु का अशुभ प्रभाव

राहु को ज्योतिष में क्रूर ग्रह माना गया है, जिसके चलते ये किसी कुंडली में जिस स्थिति में होता है उस जातक को उसी स्थिति के अनुसार फल देता है। इसलिए किसी कुंडली में राहु का मजबूत होना, जहाँ जातक को सफलता दिलाने का कार्य करता है। वहीं इसके विपरीत ये भी देखा गया है कि जिस भी कुंडली में राहु निर्बल या कमजोर होता है, उस जातक को जीवनभर कई प्रकार के कष्टों से दो-चार होना पड़ता है। कुंडली में राहु का निर्बल प्रभाव व दशा व्यक्ति को कई स्वास्थ्य समस्याएं देने का कार्य भी करती है। परंतु ज्योतिष में कमज़ोर राहु को बली बनाने के लिए कुछ सरल उपाय भी सुझाए गए है। जिन्हें कोई भी मनुष्य अपनाकर राहु की खराब दशा को अपनी कुंडली में ठीक करने में सक्षम हो सकता है।

 

कुंडली में राहु की कमज़ोर स्थिति के ये होते हैं संकेत

  • स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन आना।
  • पारिवारिक जीवन में अचानक घर के सदस्यों के बीच बात-बात पर लड़ाई-झगड़े का होना।
  • जातक को नशे आदि की लत लगना।
  • बात-बात पर क्रोध आना।
  • जातक का रुझान जादू-टोने की ओर बढ़ना।
  • रात में बार-बार नींद का टूटना या नींद में डरावने सपने आना या सोते समय डर लगना या बेचैनी महसूस करना।
  • घर में अचानक किसी पत्थर या कांच का चटकना या टूटना।
  • पेट संबंधी कोई रोग, गैस की समस्या, पागलपन, अचानक सिर दर्द जैसी समस्याओं का होना।

इन सरल उपायों से करें अपनी कुंडली में मौजूद राहु दोष को दूर 

  • चांदी के बने 2 सांप बहते हुए किसी जल में प्रवाहित करना भी, कुंडली में राहु को मजबूत करता है।
  • कुंडली में हर प्रकार के राहु दोष को दूर करने के लिए हर शनिवार का व्रत करना चाहिए।
  • घर के पूजा स्थान पर राहु यंत्र की विधि अनुसार स्थापना कर, प्रतिदिन उस यंत्र की आराधना करें।
  • यदि आपको राहु की कमजोर दशा के कारण रात में नींद नहीं आती, तो इसके लिए आप अपने सिरहाने पर जौ के कुछ दाने रखें और फिर अगली सुबह उन्हें दान करें।
  • आप   राहु ग्रह शांति पूजा के माध्यम से भी राहु की अशुभता को दूर कर अनेक प्रकार की मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।
  • राहु के बीज मंत्र ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का 18,000 बार उच्चारण करना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

 

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा omasttro के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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