साल 2022 में शनि देव अपना राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। जिसके अनुसार कुछ राशि वालों पर से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव खत्म हो जायेगा। वहीं कुछ राशि वालों पर शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती शुरु हो जायेगी। शनि अपना राशि परिवर्तन कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शनिदेव के मकर राशि में जाते ही धनु, मकर और कुंभ राशि वालों पर साढ़ेसाती चलेगी और मिथुन व तुला राशि वालों पर ढैय्या का प्रभाव देखने को मिलेगा। कई लोग इस दौरान शनि की महादशा और अंतर्दशा से प्रभावित रहेंगे।

शनि महाराज को सभी ग्रहों में धीमी चाल से चलने वाला माना जाता है। इसलिए इनका अच्छा और बुरा प्रभाव आने-जाने में कुछ वक्त लगता है। इसलिए शनि की दशा, राशि परिवर्तन से पहले ही शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए। शनि के राशि परिवर्तन से पहले ही कुछ उपाय शुरु कर देना चाहिये। जिससे की आने वाले अशुभ प्रभाव कम हो जायें। शनि को सौम्य बनाने के लिए करें ये उपाय…

शनि को शांत रखने के लिये इस विधि से करें पीपल की पूजा

शास्त्रों के अनुसार शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से शनिदेव उस व्यक्ति को कभी नहीं सताते। क्योंकि एक कथा के अनुसार शनि देव ने पिप्लाद ऋषि को वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति पीपल को पूजेगा उसे कभी नहीं सताएंगे। इसलिये शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें।

इसके साथ ही शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध चढ़ायें और पीपल को तिल, गुड़ अर्पित करें। ऐसा लगातार 21 दिनों तक करें शनि से मिलने वाले कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

आपने खान-पान का रखें ध्यान

शनिदेव को तामसिक भोजन पसंद नहीं है इसलिये इस दौरान अपना खानपान सात्विक रखें और कुछ चीजों से दूर रहें तो बेहतर होगा, जैसे मदिरा, मांस, गुटखा इन सब चीजों से दूर रहें। मांस मदिरा का सेवन कर लिया तो शनिवार क दिन बचें यौ खाने के बाद एक लौंग चबा लें।



कमजोर और गरीब लोगों को ना सतायें

शनिदेव का गरीब, कमजोर लोगों पर शनि की कृपा रहती है। वहीं गरीब व कमजोर लोगों से कभी झूठ, कपट धोखा ना करें। शनि के इस गोचर के दौरान कमजोर और गरीब लोगों की सहायता करें और जरुरतमंदों को सामान दें।



शनिवार के दिन इन का करें दान

अगर पर भी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लगने वाली है तो शनिवार के दिन शनिदेव को गुड़ और चने के साथ पूजा करें और प्रसाद को स्वयं ना खाये, बाकी दूसरों में बांट दें। इसके अलावा शनि के गोचरकाल में काला जूता, काला कंबल, काले तिल, उड़द की दाल और खिचड़ी बांटें। शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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