Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

News & Update

कुंडली रिपोर्ट , शनि रिपोर्ट , करियर रिपोर्ट , आर्थिक रिपोर्ट जैसी रिपोर्ट पाए और घर बैठे जाने अपना भाग्य अभी आर्डर करे
❣️❣️ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।❣️❣️ ज्योतिष: वेद चक्षु नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिव तराय च नमः।।>

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

January 28, 2023 14:42
Omasttro
 
     ब्रह्माजी बोले-नारद! शब्द आदि पंचभूतों द्वारा पंचकरण करके उनके स्थूल, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी, पर्वत, समुद्र, वृक्ष और कला आदि से युगों और कालों की मैंने रचना की तथा और भी कई पदार्थ मैंने बनाए | उत्पत्ति और विनाश वाले पदार्थों का भी मैंने निर्माण किया हैं परन्तु जब इससे भी मुझे संतोष नहीं हुआ तो मैंने माँ अम्बा सहित भगवान शिव का ध्यान करके सृष्टि के अन्य पदार्थों की रचना की और अपने नेत्रों से मरीच को, ह्रदय से भृगु को, सिर से अंगिरा को, कान से मुनिश्रेष्ठ पुलह को, उदान से पुलस्त्य को, समान से वशिष्ठ को, अपान से कृतु को, दोनों कानो से अत्री को, प्राण से दक्ष की और गोद से तुमको, छाया से कर्दम मुनि को उत्पन्न किया |
 
सब साधनओ के साधन धर्म को भी मैंने अपने संकल्प से प्रकट किया | मुनिश्रेष्ठ! इस तरह साधकों की रचना करके, महादेव जी की कृपा से मैंने अपने को कृतार्थ माना | मेरे संकल्प से उत्पन्न धर्म मेरी आज्ञा से मानव का रूप धारण कर साधन में लग गए | इसके उपरान्त मैंने अपने शरीर के विभिन्न अंगों से देवता व असुरों के रूप में अनेक पुत्रों की रचना करके उन्हें विभिन्न शरीर प्रदान किए | तत्पश्चात भगवान शिव की प्रेरणा से मैं अपने शारीर को दो भागों में विभक्त कर दो रूपों वाला हो गया | मैं आधे शारीर से पुरुष व आधे से नारी हो गया |
 
पुरुष स्वयंभुव मनु नाम से प्रसिद्ध हुए एवं उच्चकोटि के साधक कहलाए | नारी रूप से शतरूपा नाम वाली योगिनी एवं परम तपस्विनी स्त्री उत्पन्न हुई | मनु ने वैवाहिक विधि से अत्यंत सुंदरी, शतरूपा का पाणिग्रहण किया और मैथुन द्वारा सृष्टि को उत्पन्न करने लगे | उन्होंने शतरूपा से प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक दो पुत्र तथा आकूति, देवहूति और प्रसूति नामक तीन पुत्रियां प्राप्त की | आकूति का ‘रूचि’ मुनि से, देवहूति का ‘कर्दम’ मुनि से तथा प्रसूति का ‘दक्ष प्रजापति’ के साथ विवाह कर दिया गया | इनकी संतानों से पूरा जगत चराचर हो गया |
 
     रूचि और आकूति के वैवाहिक सम्बन्ध में यज्ञ और दक्षिणा नामक स्त्री-पुरुष का जोड़ा उत्पन्न हुआ | यज्ञ की दक्षिणा से बारह पुत्र हुए | मुने! कर्दम और देवहूति के सम्बन्ध से बहुत सी पुत्रियां पैदा हुई | दक्ष और प्रसूति के चौबीस कन्याएं हुई | दक्ष ने तेरह कन्याओं का विवाह धर्म से कर दिया | ये तेरह कन्याएँ-श्रद्धा, लक्ष्मी, धृति, तुष्टि, पुष्टि, मेधा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वसु, शान्ति, सिद्धि और कीर्ति हैं | अन्य ग्यारह कन्याओं-ख्याति, सती, संभूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा, संनति, अनसूया, ऊर्जा, स्वाहा और स्वधा का विवाह भृगु, शिव, मरीचि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, अत्रि, वशिष्ठ, अग्नि और पितर नामक मुनियों से संपन्न हुआ | इनकी संतानों से पूरा त्रिलोक भर गया |
 
     अंबिका पति महादेव जी की आज्ञा से प्राणी श्रेष्ठ मुनियों के रूप में उत्पन्न हुए | कल्पभेद से दक्ष की साठ कन्याए हुई | उनमे से दस कन्याओं का विवाह धर्म से, सत्ताईस का चंद्रमा से, तेरह कन्याओं का विवाह कश्यप ऋषि से संपन्न हुआ | नारद! उन्होंने चार कन्याएं अरिष्टनेमि को ब्याह दी | भृगु, अंगिरा और कुशश्व से दो-दो कन्याओ का विवाह कर दिया | कश्यप ऋषि की संतानों से सम्पूर्ण त्रिलोक आलोकित हैं | देवता, ऋषि, दैत्य, वृक्ष, पक्षी, पर्वत तथा लताएं आदि कश्यप पत्नियों से पैदा हुए हैं | इस तरह भगवान शंकर की आज्ञा से ब्रह्माजी ने पूरी सृष्टि की रचना की | सर्वव्यापी शिवजी द्वारा तपस्या के लिए प्रकट देवी, जिन्हें रुद्रदेव ने त्रिशूल के अग्रभाग पर रखकर उनकी रक्षा की वे सती देवी ही दक्ष से प्रकट हुई थी | उन्होंने भक्तों का उद्धार करने के लिए अनेक लीलाएं की | इस प्रकार देवी शिवा ही सती के रूप में भगवान शंकर की अर्धांगिनी बनी | परन्तु अपने पिता के यज्ञ में अपने पति का अपमान देखकर उन्होंने अपने शरीर को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया | देवताओं की प्रार्थना पर ही वे माँ सती पार्वती के रूप में प्रकट हुई और कठिन तपस्या करके उन्होंने पुनःभगवान भोलेनाथ को प्राप्त कर लिया | वे इस संसार में कलिका, चण्डिका, भद्रा, चामुण्डा, विजया, जया, जयंती, भद्रकाली, दुर्गा, भगवती, कामाख्या, कामदा, अंबा, मृडानी और सर्वमंगला आदि अनेक नामों से पूजी जाती हैं | देवी के ये नाम भोग और मोक्ष को देने वाले हैं |
 
     मुनि नारद! इस प्रकार मैंने तुम्हे सृष्टि की उत्पत्ति की कथा सुनाई हैं | पूरा ब्रह्माण्ड भगवान शिव की आज्ञा से मेरे द्वारा रचा गया हैं | ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र आदि तीनो देवता उन्ही महादेव के अंश हैं | भगवान शिव निर्गुण और सगुन हैं | वे शिवलोक में शिव के साथ निवास करते हैं | 
 
 
|| शिव पुराण ||
error: Content is protected !!
Join Omasttro
Scan the code

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो

आपका हार्दिक स्वागत करता है ,

ॐ एस्ट्रो से अभी जुड़े 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

Om Asttro / ॐ एस्ट्रो will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.
%d bloggers like this: