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January 28, 2023 15:26
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  कामदेव को ब्रह्माजी द्वारा शाप देना 

 
 
ब्रह्माजी ने कहा-हें नारद! सभी ऋषि-मुनि उस पुरुष के लिए उचित नाम खोजने लगे | तब सोच-विचारकर वे बोले कि तुमने उत्पन्न होते ही ब्रह्मा का मन मंथन कर दिया | अतः तुम्हारा पहला नाम मंथन होगा | तुम्हारे जैसा इस संसार में कोई नहीं हैं इसलिए तुम्हारा दूसरा नाम काम होगा | तीसरा नाम मदन और चौथा नाम कंदर्प होगा | अपने नामों के विषय में जानते ही काम ने अपने पांच बाणों का नामकरण कर उनका परीक्षण किया | काम ने अपने पांच बाणों को हर्षण, रोचन, मोहन, शोषण और मारण नाम से सुशोभित किया | ये बाण ऋषि-मुनियों को भी मोहित कर सकते थे | उस स्थान पर बहुत देवता व ऋषि उपस्थित थे | उस समय संध्या भी वही थी | कामदेव द्वारा =चलाए गए बाणों के फलस्वरूप सभी मोहित हो गए |
 
सबके मनो में विकार आ गया | सभी काम के वशीभूत हो चुके थे | प्रजापति, मरीचि, अत्रि, दक्ष आदि सभी मुनियों के साथ-साथ ब्रह्माजी भी काम के वश में होकर संध्या को पाने कि इच्छा करने लगे | ब्रह्मा व उनके मानस पुत्रों, सभी को एक कन्या पर मोहित होते देखकर धर्म को बहुत दुख हुआ | धर्म ने धर्मरक्षक त्रिलोकीनाथ का स्मरण किया | तब मुझे देखकर शिवजी हसें और कहने लगे-हें ब्रह्मा! अपनी पुत्री के ही प्रति तुम मोहित कैसे हो गए ? सूर्य का दर्शन करने वाले दक्ष, मरीचि आदि योगियों का निर्मल मन कैसे स्त्री को देखते ही मलिन हो गया ? जिन देवताओं का मन स्त्री के प्रति आसक्त हो, उनके साथ शस्त्र संगती किस प्रकार की जा सकती हैं ? 
 
     इस प्रकार के शिव वचन सुनकर मुझे बहुत लज्जा का अनुभव हुआ और मेरा पूरा शरीर पसीने-पसीने हो गया | मेरा विकार समाप्त हो गया परन्तु मेरे शरीर से जो पसीना नीचे गिरा उससे पितृगणों की उत्पत्ति हुई | उससे चौसठ हजार आग्नेश्वतो पितृगण उत्पन्न हुए और छियासी हजार बहिर्षद पितर हुए | एक सर्व गुण संपन्न, अति सुन्दर कन्या भी उत्पन्न हुई, जिसका नाम रति था | उसका रूप-सौंदर्य देखकर ऋतु आदि स्थलित हो गए एवं उससे अनेक पितरों की उत्पत्ति हुई | इस प्रकार संध्या से बहुत से पितरों की उत्पत्ति हुई |
 
     शिवजी के वह से अंतर्धान होने पर मैं काम पर क्रोधित हुआ | मेरे क्रुद्ध होने पर काम ने वह बाण वापस खींच लिया | बाण के निकलते ही मैं क्रोध की अग्नि से जलने लगा | मैंने काम को शिव बाण से भस्म होने का शाप दे डाला | यह सुनकर काम और रति दोनों मेरे चरणों में गिर पड़े और मेरी स्तुति करने लगे तथा क्षमा-याचना करने लगे |
 
     तब काम ने कहा-हें प्रभु! आपने ही तो मुझे वर देते हुए कहा था कि ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र समेत सभी देवता, ऋषि-मुनि और मनुष्य तुम्हारे वश में होंगे | मैं तो सिर्फ अपनी उस शक्ति का परीक्षण कर रहा था | इसलिए मैं निरपराध हूँ | प्रभु मुझ पर कृपा करें | इस शाप के प्रभाव को समाप्त करने का उपाय बताए | 
 
     इस प्रकार काम के वचनों को सुनकर ब्रह्माजी का क्रोध शांत हुआ | तब उन्होंने कहा कि मेरा शप झूठ नहीं हो सकता | इसलिए तुम महादेव के तीसरे नेत्र रुपी अग्नि बाण से भस्म हो जाओगे | परन्तु कुछ समय पश्चात जब शिवजी विवाह करेंगे अर्थात उनके जीवन में देवी पार्वती आएंगी, तब तुम्हारा शरीर तुम्हे पुनः प्राप्त हो जाएगा |
 
 
|| शिवपुराण ||
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