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January 28, 2023 15:23
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ब्रह्मा-विष्णु संवाद 

 
 
     ब्रह्माजी बोले-नारद! काम के चले जाने पर श्री महादेव जी को मोहित कराने का मेरा अहंकार गिरकर चूर-चूर हो गया परन्तु मेरे मन में यही चलता रहा कि ऐसा क्या करू, जिससे महात्मा शिवजी स्त्री ग्रहण कर ले | यह सोचते-सोचते मुझे विष्णुजी का स्मरण हुआ | उन्हें याद करते ही पीताम्बरधारी श्रीहरि विष्णु मेरे सामने प्रकट हो गए | मैंने उनकी प्रसन्नता के लिए उनकी बहुत स्तुति की | तब विष्णुजी मुझसे पूछने लगे कि मैंने उनका स्मरण किस उद्देश्य से किया था ? यदि तुम्हे कोई दुख या कष्ट हैं तो कृपया मुझे बताओ मैं उस दुख को मिटा दूंगा | तब मैंने उनसे कहा-हें केशव! यदि भगवान शिव किसी तरह पत्नी ग्रहण कर ले अर्थात विवाह कर ले तो मेरे सभी दुख दूर हो जाएंगे | मैं पुनः सुखी हो जाऊँगा | मेरी यह बात सुनकर भगवान मधुसूदन हँसने लगे और मुझे लोकस्रष्टा  ब्रह्मा का हर्ष बढ़ाते हुए बोले-
 
     हें ब्रह्माजी! मेरी बातो को सुनकर आपके सभी भ्रमों का निवारण हो जाएगा | शिवजी ही सबके करता और भर्ता हैं | वे ही इस संसार का पालन करते हैं | वे ही पापों का नाश करते हैं | भगवान शिव ही परब्रह्म, परेश, निर्गुण, नित्य, अनिर्देश्य, निर्विकार, अद्वितीय, अनंत और सबका अंत करने वाले हैं | वे सर्वव्यापी हैं | तीनो गुणों को आश्रय देने वाले, ब्रह्मा, विष्णु और महेश नाम से प्रसिद्ध रजोगुण, तमोगुण, सत्वगुण से दूर एवं माया से रहित हैं | भगवान शिव योगपरायण और भक्तवत्सल हैं | 
 
     हें विधे! जब भगवान शिव ने आपकी कृपा से हमें प्रकट किया था | उस समय उन्होंने हमें बताया था कि ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र तीनो मेरे ही अवतार होंगे परन्तु रूद्र को मेरा पूर्ण रूप मन जाएगा | इसी प्रकार देवी उमा के भी तीन रूप होंगे | एक रूप का नाम लक्ष्मी होगा और वह श्रीहरि की पत्नी होगी | दूसरा रूप सरस्वती का होगा और वे ब्रह्माजी की पत्नी होंगी | देवी सती उमा का पूर्णरूप होगी | वे ही भावी रूद्र की पत्नी होगी | ऐसा कहकर भगवान महेश्वर वहा से अंतर्धान हो गए | समय आने पर हम दोनों (ब्रह्मा-विष्णु) का विवाह देवी सरस्वती और देवी लक्ष्मी से हुआ | 
 
     भगवान शिव ने रूद्र के रूप में अवतार लिया | वे कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं | जैसा कि भगवान शिव ने बताया था कि रूद्र अवतार की पत्नी देवी सती होगी, जो साक्षात शिव रूप हैं | अतः तुम्हे उनक्वे अवतरण हेतु प्रार्थना करनी चाहिए | अपने मनोरथ का ध्यान करते हुए देवी शिव की स्तुति करो | वे देवेश्वरी प्रसन्न होने पर तुम्हारी सभी परेशानियों और बधाओ को दूर कर देगी | इसलिए तुम सच्चे ह्रदय से उनका स्मरण कर उनकी स्तुति करो | यदि शिवा प्रसन्न हो जाएंगी तो वे पृथ्वी पर अवतरित होंगी | वे इस लोक में किसी मनुष्य की पुत्री बनकर मानव शरीर धारण करेंगी | तब वे निश्चय ही भगवान रूद्र का वरन कर उन्हें पति रूप में प्राप्त करेंगी | तब तुम्हारी सभी इच्छाएं अवश्य पूर्ण होंगी | अतएव तुम प्रजापति दक्ष को यह आज्ञा दो कि वे तपस्या करना आरम्भ करें | उनके तप के प्रभाव से ही पार्वती देवी सती के रूप में उनके यहाँ जन्म लेंगी | देवी सती ही महादेव को विवाह सूत्र में बांधेंगी | शिवा और शिवजी दोनों निर्गुण और परम ब्रह्मस्वरूप हैं और अपने भक्तो के पूर्णतः अधीन हैं | वे उनकी इच्छानुसार कार्य करते हैं | 
 
     ऐसा कहकर भगवान श्रीहरि विष्णु वह से अंतर्धान हो गए | उनकी बाते सुनकर मुझे बड़ा संतोष हुआ क्योंकि मुझे मेरे दुखो और कष्टों का निवारण करने का उपाय मालूम हो गया था | 
 
|| शिवपुराण ||
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