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January 28, 2023 01:54
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ब्रह्माजी की काली देवी से प्रार्थना 

 
     नारद जी बोले-पूज्य पिताजी! विष्णुजी के वह से चले जाने पर क्या हुआ ? ब्रह्माजी कहने लगे कि जब भगवान विष्णु वहा से चले गए तो मैं देवी दुर्गा का स्मरण करने लगा और उनकी स्तुति करने लगा | मैंने माँ जगदम्बा से यही प्रार्थना की कि वे मेरा मनोरथ पूर्ण करे | वे पृथ्वी पर अवतरित होकर भगवान शिव का वरण कर उन्हें विवाह बंधन में बांधे | मेरी अनन्य भक्ति-स्तुति से प्रसन्न हो योगनिद्रा चामुण्डा मेरे सामने प्रकट हुई | उनकी कज्जल सी कांति, रूप सुन्दर और दिव्य था | वे चार भुजाओं वाले शेर पर बैठी थी | उन्हें सामने देख मैंने उनको अत्यंत नम्रता से प्रणाम किया और उनकी पूजा उपासना की | तब मैंने उन्हें बताया कि देवी! भगवान शिव रूद्र रूप में कैलाश पर्वत पर निवास कर रहे हैं | वे समाधि लगाकर तपस्या में लीन हैं | वे पूर्ण योगी हैं | भगवान रूद्र ब्रह्मचारी हैं और वे गृहस्थ जीवन में प्रवेश नहीं करना चाहते | वे विवाह नहीं करना चाहते | अतः आप उन्हें मोहित कर उनकी पत्नी बनना स्वीकार करे | हें देवी! स्त्री के कारण ही भगवान शिव ने मेरा मजाक उड़ाया हैं और मेरी निंदा की हैं | इसलिए मैं भी उन्हें स्त्री के लिए आसक्त देखना चाहता हूँ | देवी! आपके अलावा कोई भी इतना शक्तिशाली नहीं हैं कि वह भगवान शंकर को मोह में डाले | मेरा आपसे अनुरोध हैं कि आप प्रजापति दक्ष के यहाँ उनकी कन्या के रूप में जन्म ले और भगवान शिव का वरण कर उन्हें गृहस्थ आश्रम में प्रवेश कराएं |
 
     देवी चामुण्डा बोली-हें ब्रह्मा! भगवान शिव तो परम योगी हैं | भला उनको मोहित करके तुम्हे क्या लाभ होगा ? इसके लिए तुम मुझसे क्या चाहते हो ? मैं तो हमेशा से ही उनकी दासी हूँ | उन्होंने अपने भक्तो का उद्धार करने के लिए ही रूद्र अवतार धारण किया हैं | यह कहकर वे शिवजी का स्मरण करने लगी | फिर वे कहने लगी कि यह तो सच हैं कि कोई भगवान शिव को मोहमाया के बंधनों में नहीं बाँध सकता | इस संसार में कोई भी शिवजी को मोहित नहीं कर सकता | मुझमे भी इतनी शक्ति नहीं हैं कि उन्हें उनके कर्तव्य-पथ से विमुख कर सकू | फिर भी आपकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर मैं इसका प्रयत्न करूंगी जिससे भगवान शिव मोहित होकर विवाह कर ले | मैं सती रूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरित होउंगी | यह कहकर देवी वहा से अंतर्धान हो गई | 
 
|| शिवपुराण ||
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