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January 28, 2023 15:35
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काम-रति विवाह

 


नारद जी ने पूछा-हें ब्रह्माजी! इसके पश्चात क्या हुआ ? आप मुझे इससे आगे की कथा भी बताइए | भगवन काम और रति का विवाह हुआ या नहीं ? आपके शाप का क्या हुआ ? कृपया इसके बारे में भी मुझे सविस्तार बताइए |

ब्रह्माजी बोले-शिवजी के वह से अन्तर्धान हो जाने पर दक्ष ने काम से कहा-हें कामदेव! आपके ही समान गुणों वाली परम सुन्दरी एवं सुशीला कन्या को तुम पत्नी के रूप में स्वीकार करो | मेरी पुत्री सर्वगुण संपन्न हैं तथा हर तरीके से आपके लिए सुयोग्य हैं | हें महातेजस्वी मनोभव! यह हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी और तुम्हारी इच्छानुसार कार्य करेगी | यह कहकर दक्ष ने अपनी कन्या, जो उनके पसीने से उत्पन्न हुई थी, का नाम ‘रति’ रख दिया | तत्पश्चात कामदेव और रति का विवाह सोल्लास संपन्न हुआ | हें नारद! दक्ष की पुत्री रति बड़ी रमणीय और परम सुंदरी थी | उसका रूप-लावण्य मुनियों को भी मोह लेने वाला था | रति से विवाह होने पर कामदेव अत्यंत प्रसन्न हुए | वे रति पर पूर्ण मोहित थे | उनके विवाह पर बहुत बड़ा उत्सव हुआ | प्रजापति दक्ष पुत्री के लिए सुयोग्य वर पाकर बहुत खुश थे | दक्षकन्या देवी रति भी कामदेव को पाकर धन्य हो गई थी | जिस प्रकार बादलों में बिजली शोभा पति हैं, उसी प्रकार कामदेव के साथ रति शोभा पा रही थी | कामदेव ने रति को अपने ह्रदय सिंहासन में बैठाया तो रति भी कामदेव को पाकर उसी प्रकार संपन्न हुई, जिस प्रकार श्रीहरि को पाकर देवी लक्ष्मी | उस समय आनंद और खुशी से सराबोर कामदेव व रति भगवान शिव का शाप भूल गए |

सूत जी कहते हें-ब्रह्माजी का यह कथन सुनकर महर्षि नारद बड़े प्रसन्न हुए और हर्षपूर्वक बोले-हें महामते! आपने भगवान शिव की अद्भुत लीला मुझे सुनाई हैं | प्रभो! अब मुझे आप यह बताइए कि कामदेव और रति के विवाह के उपरान्त सब देवताओं के अपने धाम चले जाने के बाद, पितरो को उत्पन्न करने वाली ब्रह्मकुमारी संध्या कहा हैं ? उनका विवाह कब और किससे हुआ ? संध्या के विषय में मेरी जिज्ञासा शांत करिए |

 

|| शिवपुराण ||

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