वैदिक ज्योतिष में सूर्य को समस्त ग्रहों का राजा माना गया है। हिन्दू धार्मिक दृष्टि से भी सूर्य को एक प्रत्यक्ष देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए भी सूर्य का हर स्थान परिवर्तन, फिर भले ही वो राशि गोचर हो नक्षत्र प्रवेश, उनके हर एक परिवर्तन को ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जाता है। अब यही सूर्य ग्रह अपना नक्षत्र परिवर्तन करते हुए आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और सभी 12 राशियों के जातकों के साथ-साथ देश-दुनिया में भी अपना प्रभाव दिखाएंगे।

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वैदिक ज्योतिष में आरोग्य के कारक सूर्य ग्रह को विश्व की ऊर्जा व प्रकाश का प्रतीक माना गया हैं। यही कारण है कि उनका छोटे-से-छोटा स्थान परिवर्तन भी समस्त मानव जीवन पर प्रभाव डालता है। क्योंकि सूर्य की स्थिति के अनुसार ही विशेषज्ञ ज्योतिषी ज्योतिष गणना करते हुए सटीक भविष्यवाणी करने में सफल रहते हैं।

एस्ट्रोसेज के ज्योतिषचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रह जिस विशेष काल या समय में किसी राशि या नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, सूर्य की वो स्थिति दुनियाभर में बहुत से बदलाव लेकर आती है। इसी क्रम में अब सूर्य जल्द ही आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जो ज्योतिष शास्त्र के लिहाज़ से बहुत अहम घटना होती है।

 

ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र 

भारतीय ज्योतिष के सभी 27 नक्षत्रों में से क्रमानुसार छठा नक्षत्र ‘आर्द्रा” होता है। कई शास्त्रों में इस नक्षत्र के अंतर्गत आने वाले जातकों को स्वभाव से चतुर व चालाक बताया है। आर्द्रा नक्षत्र की राशि मिथुन है, जो बुध ग्रह की राशि होती है। जबकि आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी छाया ग्रह राहु को माना जाता है।

 

सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश की अवधि

अब सूर्य देव 22 जून 2022, को दोपहर 11 बजकर 42 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में सूर्य ग्रह अगले माह की 06 जुलाई की दोपहर 11 बजकर 09 मिनट तक रहेंगे। ऐसे में मिथुन राशि में विराजमान होते हुए आर्द्रा नक्षत्र के विभिन्न चरणों में अपना भ्रमण करेंगे और देशभर में बदलावों के साथ-साथ कई राशियों पर भी अपना प्रभाव डालेंगे।

आइये अब एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञ ज्योतिषी से समझते हैं सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश का प्रभाव और फल:-

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आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से जुड़ी कुछ अहम बातें

  • धार्मिक महत्व 

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करना सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। क्योंकि मान्यताओं के अनुसार इस दौरान भगवान शंकर और भगवान विष्णु जी की पूजा-आराधना किये जाने का विधान है। खासतौर से उत्तरी भारत के कई राज्यों में इस दिन भगवान शिव और विष्णु जी को खीर-पूरी और आम के फल का भोग लगाया जाता है।

 

  • वर्षा ऋतु के प्रारंभ का प्रतीक 

कई ज्योतिष शास्त्रों में ये उल्लेख मिलता है कि सूर्य साल के जिस समय आर्द्रा नक्षत्र में होते हैं, तो उस अवधि में भूमि रजस्वला होती है। ज्योतिष विद्वान इस अवधि को भारत में वर्षा ऋतु के प्रारंभ का संकेत मानते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष आषाढ़ के माह में आर्द्रा नक्षत्र का उदय होता है। वहीं इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार देखें तो अमूमन ये स्थिति जून माह के तीसरे सप्ताह में बनती है। इस दौरान देशभर के उत्तरी राज्य जो सूर्य के प्रचंड प्रकोप से तप रहे होते हैं, उन्हें कुछ राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ये वो समय होता है जब मौसम में बड़े परिवर्तन साफ़ तौर पर दिखाई देते हैं और पुरवाई हवा के साथ वातावरण में उमस और नमी महसूस होने लगती है।

ज्योतिष में एक वर्ष में जहाँ 6 महीने सूर्य उत्तरायण में तो वहीं 6 महीने सूर्य दक्षिणायन में रहते हैं। पंचांग में सूर्य के आर्द्रा में प्रवेश करते ही दक्षिणायन आरंभ होता है। सूर्य और व नक्षत्र के ये संबंध वर्षा ऋतु के लिए शुभारंभ करते हुए वर्षा कारक योग का निर्माण करता है। देशभर के किसान इस समय की सालभर शिद्दत से प्रतीक्षा करते हैं।

  • आर्द्रा नक्षत्र की राशि और उनके स्वामी ग्रह 

एस्ट्रोसेज के ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य 22 जून से 06 जुलाई तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र में होते हुए आर्द्रा नक्षत्र की ही राशि मिथुन में ही विराजमान होंगे। इसके अलावा आर्द्रा नक्षत्र के ग्रह स्वामी राहु को माना गया है। जबकि मिथुन राशि के ग्रह स्वामी बुध देव होते हैं। ग्रह मैत्री चक्र के अनुसार बुध और सूर्य मित्र ग्रह हैं, जबकि राहु को असुर ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है।

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सूर्य का आर्द्रा में नक्षत्र फल surya namaskarsurya namaskar

अब 22 जून से 6 जुलाई तक सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में ही होंगे। इस दौरान शनिदेव पहले ही अपनी वक्री चाल चल रहे होंगे और 2 जुलाई को बुध भी अपनी ही स्वराशि मिथुन में प्रवेश कर जाएंगे। इसलिए उपरोक्त ग्रह स्थितियों के कारण भी इस वर्ष सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र समस्त राशियों के लिए विशेष महत्वपूर्ण। जानकारों की मानें तो चूँकि सूर्य का बुध के साथ मित्रता का भाव होता है, ऐसे में सूर्य का मिथुन राशि में होते हुए मिथुन राशि के नक्षत्र “आर्द्रा” में प्रवेश करना, विशेषकर के मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए अनुकूल रहेगा। वहीं वृषभ, कन्या व कर्क राशि वालों के लिए इसके फलस्वरूप किसी प्रकार के धन हानि होने के योग भी बनेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य राशियों के लिए ये अवधि मिश्रित परिणाम लेकर आ रही है।

ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र- विभिन्न चरण व उनमें सूर्य की समय अवधि   surya namaskar

चूँकि आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी ग्रह राहु होते हैं, जिन्हें असुर ग्रह माना गया है। इसलिए खासतौर से इस नक्षत्र के जातकों का स्वभाव ईर्ष्या, चालाकी, भयंकर क्रोध, तपस्वी एवं विलक्षण वाला होता है। ये लोग दूसरों से व परम्परा से हटकर अपने अनुसार कार्य करते हैं। हर नक्षत्र की तरह ही आर्द्रा नक्षत्र के भी चार चरण होते हैं, जिसमें सूर्य एक-एक कर अपना प्रवेश करेंगे और प्रभाव दिखाएंगे। सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र के सभी चार चरणों की समयावधि कुछ इस प्रकार है:-

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  1. सूर्य का आर्द्रा में प्रथम चरण:

सूर्य आर्द्रा के प्रथम चरण में 22 जून 2022 की दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से लेकर 25 जून 2022 की रात्रि 11 बजकर 31 मिनट तक रहेंगे। आर्द्रा नक्षत्र के पहले चरण के स्वामी ग्रह गुरु बृहस्पति होते हैं। ऐसे में आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु और आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी बृहस्पति के बीच मित्रता होने के कारण मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों में इस दौरान धार्मिक प्रवत्ति की उन्नति होगी। ये जातक धर्म-कर्म के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते दिखाई देंगे।

  1. सूर्य का आर्द्रा में द्वितीय चरण:

सूर्य आर्द्रा के द्वितीय यानी दूसरे चरण में 25 जून 2022 की रात्रि 11 बजकर 32 मिनट से लेकर 29 जून की दोपहर 11 बजकर 23 मिनट तक रहेंगे। इस चरण के स्वामी ग्रह शनि होते हैं। ऐसे में इस दौरान आर्द्रा नक्षत्र के दूसरे चरण पर विशेष रूप से सबसे अधिक राहु, सूर्य तथा शनि का प्रभाव होने से कुछ जातकों में भौतिकवादी और निराशा की भावना प्रबल हो सकती है। ऐसे जातकों में इस दौरान उपरोक्त ग्रहों का प्रभाव उनके अंदर कामुक विचारों की वृद्धि करते हुए, उनका मन कार्यक्षेत्र से कुछ भ्रमित भी कर सकता है।

  1. सूर्य का आर्द्रा में तृतीय चरण:

सूर्य आर्द्रा के तृतीय यानी तीसरे चरण में 29 जून की दोपहर 11 बजकर 24 मिनट से लेकर, 02 जुलाई की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेंगे। आर्द्रा नक्षत्र के इस चरण के ग्रह स्वामी भी शनि होते हैं। ऐसे में इस चरण के ग्रह स्वामी शनि और राहु के बीच भारतीय ज्योतिष के नियम अनुसार मित्रता का स्वभाव होता है। परंतु इस समयावधि में शनि का वक्री गति चलना, खासतौर से मकर और कुंभ राशि के जातकों को कुछ नौकरी या व्यापार से जुड़ी समस्या दे सकता है।

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  1. सूर्य का आर्द्रा में चतुर्थ चरण:

सूर्य आर्द्रा के चतुर्थ यानी चौथे चरण में 02 जुलाई की रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से लेकर, 06 जुलाई की दोपहर 11 बजकर 09 मिनट तक रहेंगे। ये आर्द्रा नक्षत्र का अंतिम चरण होता है और इस चरण के ग्रह स्वामी गुरु को माना जाता है और इस दौरान सूर्य का इस चरण में होना और गुरु-राहु के बीच मित्रता का भाव, कई जातकों को बुद्धिमान और भ्रमणशील बनाने के साथ-साथ भावुक, दानी और दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहने वाला बनाएगा। हालांकि इसके चलते जातकों को अपना कुछ धन भी खर्च करना पड़ सकता है।

 

सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के दौरान किये जाने वाले उपाय 

ज्योतिष विशेषज्ञ की मानें तो सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करना कई मायनों में शुभ माना गया है। ऐसे में जातक कुछ उपायों की मदद से इस शुभ घटना से अत्यधिक उत्तम परिणाम प्राप्त करते हुए, अपनी कुंडली में सूर्य से संबंधित कई कुप्रभावों को दूर कर सकते हैं। ये उपाय न केवल जातकों का इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव से बचाव करेंगे, बल्कि सूर्य ग्रह के फलों को भी बढ़ाने में सफल होंगे। आर्द्रा नक्षत्र और सूर्य ग्रह संबंधित उपाय कुछ इस प्रकार है:-

  • ज्योतिष मतानुसार यदि आपका जन्म नक्षत्र आर्द्रा है तो आपको नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
  • भगवान शिव की पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना भी आपके लिए शुभ रहेगा।
  • आप भगवान शिव जी के अन्य मंत्र, स्त्रोत और सहस्त्रनाम आदि का भी उच्चारण करते हुए इस नक्षत्र से संबंधित अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं।
  • आपको सफ़ेद, पीले, चमकीले या फिर गेरुआ रंग के वस्त्र धारण करने व उसका दान करने की सलाह दी जाती है।
  • जातक को आर्द्रा नक्षत्र के मंत्र “ॐ आर्द्रायै नमः” और सूर्य ग्रह के बीज मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
  • यदि आप सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के दौरान भगवान शिव की पूजा करते हुए उन्हें फूल, सफ़ेद चन्दन, धूप, दीप, बेल पत्री, मीठा प्रसाद और गाय का घी अर्पित करते हैं तो आपको निश्चित ही हर समस्या से निजात मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
  • इस नक्षत्र प्रवेश के दौरान व्यक्ति को भगवान शिव व भगवान विष्णु की पूजा करते हुए उन्हें आम के फल का भोग लगाना भी अनुकूल रहता है।

 

आर्द्रा नक्षत्र और सूर्य ग्रह का वैदिक मंत्र 

  • आर्द्रा नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-

नमस्ते रूद्रमन्यवउतो त इषवे नम: ।

बाहुभ्यामुत ते नम: ॐ रुद्राय नम: शिवाय नम: ।।

  • सूर्य ग्रह का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-

ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।

हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।

 

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