हीलिंग करते समय हीलर अपने आप को भगवान से कनेक्ट कर अपने सब्जेक्ट को हील करता है।
हीलिंग मे व्यवहार और प्रार्थना की भूमिका होती है। हम सभी लोग कभी-न-कभी प्रार्थना करते है। प्रार्थना अर्थात एक तरफ़ा भगवान से बात करना। जब आपातकाल परिस्थिती आती है जब किसी मुश्किल मे फँस जाते है, जब कोई अमूल्य वस्तु खो जाती है बड़ी आर्थिक हानि हो जाती है, प्रार्थना सांसारिक लाभ या आध्यात्मिक शोध द्वारा यह ज्ञात हुआ है की भगवान हमारी बात सुनते है, वाह जवाब भी देते है, परन्तु हमारी बुद्धि मे एकाग्रता की कमी के कारण हम सुन नहीं पाते है।


जिन साधको के जीवन का उद्देश्य अध्यमिक परिस्थिति मे ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य मे भी भगवान से प्रार्थना करते है। वह शब्द जो हम मुँह से बोलते है वह भगवान तक नहीं पहुँचते ।


भगवान तक वो शब्द पहुँचते है जो हम मन मे सोचते है। हम जो भी सोचते है प्रार्थना के माध्यम से हमारा प्रत्येक विचार भगवान तक पहुँच जाता है। कई लोगो की प्रार्थना पूर्ण नहीं होती क्यों की वह मुख से तो बहुत शब्द बोलते है परन्तु मन से कुछ और ही सोचते है।


हीलिंग के समय शुद्ध व पवित्र मन से हम अपने सब्जेक्ट के लिए प्रार्थना करते है। पवित्र मन से की गयी प्रार्थना भगवान जरूर सुनते है। हीलिंग के बाद सब्जेक्ट बहुत हल्का पन महसूस करता है।

हमारा अगला लेख अष्ट मातृका का होगा , जानने के लिए जुड़े रहे omasttro.in के साथ , धन्यवाद।

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