वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसकी प्रमुख वजह यही है कि ग्रहों का गोचर किसी भी व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार अवश्य होते हैं। इस महीने यानी सितम्बर में कई ग्रह गोचर करने वाले हैं। ऐसे में हर बार की ही तरह हम अपने इस विशेष ब्लॉग में बात करेंगे वक्री गुरु के मकर राशि में होने वाले गोचर का देश और दुनिया पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में और साथ ही जानेंगे कि इस गोचर से कौन सी राशियाँ सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली हैं।

वैदिक ज्योतिष में वक्री गुरु ग्रह 

बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि ग्रहों का वक्री होना अशुभ परिणाम लेकर आता है हालांकि ऐसा हमेशा सही हो यह आवश्यक नहीं है। यदि ग्रह किसी की कुंडली में मजबूत स्थिति में रहता है, तो यह वक्री स्थिति में होते हुए भी जातक को अनुकूल परिणाम देता है। वहीं दूसरी तरफ यदि ग्रह कमजोर स्थिति में हो तो मुमकिन है कि इससे व्यक्ति को प्रतिकूल परिणाम हासिल हो।

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को सभी ग्रहों का ‘गुरु’ कहा जाता है। यही वजह है कि अंग्रेजी में जुपिटर ग्रह को हिंदी में बृहस्पति ग्रह या गुरु ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। गुरु ग्रह मुख्यतौर पर सभी राशियों में धनु और मीन राशि पर शासन करता है और सभी 27 नक्षत्रों में से पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्रों का संचालक भी माना गया है। गुरु ग्रह जहाँ कर्क राशि में उच्च का माना गया है वहीं मकर राशि में यह नीच का होता है। यह ज्ञान, शिक्षा, ज्ञान, धन, सुख आदि का कारक है।

गुरु ग्रह के गोचर की अवधि सबसे लंबी मानी जाती है और यह लगभग 4 महीने तक वक्री स्थिति में रहता है। इसलिए बृहस्पति या गुरु ग्रह के गोचर का प्रभाव भी लंबे समय तक बना रहता है। यदि किसी की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में स्थित हो तो ऐसे जातकों को अपने माता-पिता से प्रशंसा प्राप्त होती है, शैक्षणिक क्षेत्र में प्रगति मिलती है और ऐसे व्यक्ति साहसिक निर्णय लेने में भी तत्पर रहते हैं। वहीं इसके विपरीत यदि गुरु ग्रह किसी व्यक्ति की कुंडली में कमजोर स्थिति में है, तो ऐसे जातक चुनौतियों से पार पाने में विफल रहते हैं, हमेशा अवसाद का सामना करते हैं और निराशावादी हो जाते हैं।

वक्री गुरु का गोचर जल्द ही!

मकर राशि में वक्री गुरु का गोचर 15 सितंबर 2021 को सुबह 4:22 बजे होगा, यह ग्रह 20 नवंबर 2021 को सुबह 11:23 बजे तक मकर राशि में ही रहेगा और उसके बाद कुंभ राशि में गोचर कर जाएगा। ऐसे में यह तो तय है कि इस अद्भुत गोचर का न केवल विश्व पर बल्कि सभी प्राणियों पर भी अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा।

वक्री गुरु का मकर राशि में गोचर: देश और दुनिया पर प्रभाव 

अर्थव्यवस्था: वक्री गुरु का मकर राशि में गोचर बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि कृपा और आशीर्वाद का यह ग्रह इस राशि में दुर्बल स्थिति में हो जाता है। इस गोचर के दौरान, यह नीच भंग राज योग बना रहा होगा क्योंकि बृहस्पति अपनी नीच राशि में स्वामी शनि के साथ युति में होगा, जो पहले से ही मकर राशि में स्थित है। बृहस्पति के मकर राशि में गोचर कर जाने से आईटी और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

खाद्य उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी और परिणामस्वरूप, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी इस दौरान फलेगा-फूलेगा। हालांकि इससे समाज के तीसरे दर्जे यानी मजदूर वर्ग को कोई फायदा नहीं होगा। आशंका है कि इस दौरान बैंकिंग क्षेत्र में विकास की गति काफी कम या न के बराबर हो।

स्वास्थ्य: वक्री गुरु का मकर राशि में गोचर कोरोना मामलों और इस बीमारी के अन्य रूपों को जन्म देने वाला साबित हो सकता है, परिणामस्वरूप, वैश्विक स्तर पर इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या भी बढ़ सकती है। जल जनित रोगों और अन्य प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी वृद्धि होने की आशंका है। इस संबंध में, आपको सलाह यही दी जाती है कि आप सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और सुरक्षा के अन्य मापदंडों जैसे कोविड दिशा-निर्देशों का सख्ती के साथ पालन करें। साथ ही साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और अपने खान-पान का भी ध्यान रखें।

राजनीति: राजनीतिक क्षेत्र में सत्तारूढ़ पार्टी की लोकप्रियता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की प्रबल आशंका है। बढ़ती कीमतों, किसानों के आंदोलन, बेरोजगारी, कम जीडीपी आदि जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार पर भारी दबाव डालने की कोशिश करेगा। सत्तारूढ़ पार्टी वास्तविक तथ्यों और उठाए गए मुद्दों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर सकती है। जिससे सार्वजनिक आलोचना में वृद्धि होने की संभावना है।

साथ ही, पड़ोसी देशों के साथ संबंध इस दौरान ज्यादा अनुकूल और दोस्ताना नहीं रहने वाले हैं और अफगानिस्तान में तालिबान का उदय सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है।

मौसम: मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा जाएगा और यह समय इस पक्ष के लिहाज़ से सुखद रहने की उम्मीद है। हालाँकि, वैश्विक स्तर पर कुछ प्राकृतिक आपदाएँ होने की प्रबल आशंका है।

 

वक्री गुरु के इस गोचर से इन राशियों को मिलेगा लाभ

धनु राशि, कन्या राशि, कर्क राशि और मेष राशि के जातकों के लिए वक्री गुरु का मकर राशि में गोचर शुभ रहने वाला है। इस दौरान वे अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अधिक प्रगति प्राप्त करेंगे। इसके अलावा इस दौरान कुछ जातकों को उनकी कड़ी मेहनत और उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।

गुरु ग्रह को मज़बूत बनाने के ज्योतिषीय उपाय

  • परिवार के बड़ों, अपने गुरुओं और ब्राह्मणों का सम्मान करें और यदि आप एक महिला हैं, तो अपने पति को उचित सम्मान दें।
  • अपने बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर डांटें नहीं और उनके साथ प्रेम से व्यवहार करने की कोशिश करें। अपने बड़े भाइयों के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखें।
  • गुरु ग्रह सादगी और सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए झूठ बोलने से जितना हो सके बचें। बुजुर्ग महिलाओं का बुरा न सोचें।
  • प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करें। साथ ही शिव सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करना न भूलें।
  • बृहस्पति देव/गुरु ग्रह को समर्पित गुरुवार का व्रत करें और इस दौरान फलों का ही सेवन करें और जरूरत पड़ने पर सेंधा नमक का सेवन भी कर सकते हैं। साथ ही गुरुवार के दिन केले के पेड़ के नीचे गाय के घी से भरा दीपक/दीया जलाएं। इसके अलावा मिठाई, कपड़े और पीले रंग की वस्तुओं का ज़रुरतमंदों को दान करें।
  • यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति प्रतिकूल स्थिति में होता है, तो उन्हें गुरुवार के दिन मंदिर और अनाथालयों में दान करने की सलाह दी जाती है।
  • गुरु ग्रह का अधिकतम लाभ पाने के लिए पुखराज रत्न धारण करें। हालांकि इसे धारण करने से पहले आचार्य ओमप्रकाश त्रिवेदी जी  से सलाह अवश्य लें।

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा OmAsttro के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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