मानव जीवन में शुक्र ग्रह का बहुत बड़ा योगदान व जीवन को सफल व सुंदर बनाने में पूर्ण सहयोग होता है। शुक्र ग्रह को भौतिक जीवन का कारक ग्रह भी माना जाता है। शुक्र ग्रह  चराचर जगत में सुख-समृद्धि व हर प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति में  पूर्ण सहयोग और योगदान होता है। शुक्र ग्रह  वैभवशाली स्वरूप व  सुंदरता, मध्यम शरीर, सुंदर विशाल नेत्रों वाला, जल तत्व प्रधान, दक्षिण पूर्व दिशा का स्वामी, श्वेत वर्ण, युवा किशोर अवस्था का प्रतीक है। चर प्रकृति, रजोगुणी, विलासी भोगी, मधुरता वाले स्वभाव के साथ चालबाज, तेजस्वी स्वरूप, श्याम वर्ण केश और स्त्रीकारक ग्रह है।

इसके देवता भगवान इंद्र हैं। इसका वाहन अश्व है। यदि  किसी भी जातक की जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत व शुभ स्थिति में हो तो ऐसा जातक सदैव सुख-समृद्धि व अनेकों प्रकार की भौतिक सुखों से निपुण हुआ संपन्न रहता है।  इंद्र की सभा में अप्सराओं के अधिकाधिक प्रसंग शुक्र की वजह से ही मिलते हैं। ऐसा जातक सदैव स्त्री पक्ष व प्रेम प्यार के बंधनों में बंधा रहता है।

बृहद पराशर होरा शास्त्र के अनुसार

सुखीकान्त व पुः श्रेष्ठः सुलोचना भृगु सुतः।

काब्यकर्ता कफाधिक्या निलात्मा वक्रमूर्धजः।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह को प्रेम का ग्रह माना जाता है। शुक्र ग्रह मंत्र जाप व पूजा करने से प्रेम विवाह संबंधित परेशानियों में भी पूर्ण सफलता मिलती है। प्रेम संबंधित समस्याएं शुक्र ग्रह पर निर्भर करती हैं। शुक्र ग्रह मजबूत हो तो रिश्ते अच्छे बनेंगे। वैसे बहुत कुछ बाकी ग्रहों के शुक्र से मिलने पर भी निर्भर करता है। जातक के जीवन में मुख्य रूप से शुक्र ग्रह प्रेम की भावनाओं को प्रदर्शित करता है। यदि जन्म कुंडली में स्थित शुक्र ग्रह अशुभ हो या वह किसी अशुभ ग्रह के साथ बैठने से शुक्र ग्रह का शुभ प्रभाव कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई भी जातक प्रेम विवाह या अपने दांपत्य जीवन को  सुखमय और  आनंदमय बनाना चाहता है या उसको अपने दांपत्य जीवन संबंधित अनेकों परेशानियों से कष्ट भोगना पड़ता है तो ऐसी स्थिति में जातक को शुक्र के बीज मंत्र का निरंतर जाप करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से जातक अपने दांपत्य जीवन व  प्रेम संबंधित अनेकों परेशानियों से निजात प्राप्त करता  है।

शुक्र का बीज मंत्र सदैव व्यक्ति को एक मजबूत व अन्य प्रकारों के भौतिक सुखों से जोड़ कर रखता है। इस शुक्र के बीज मंत्रों के जाप करने से मां देवी माता प्रसन्न होकर व्यक्ति को यानि जातक को पूर्ण रूप से सुखमय का वरदान प्राप्त करती है व सुखमय जीवन जीने का एक मौका देती है।

मनचाहा साथी दिलाता है शुक्र बीज मंत्र

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कोई भी जातक प्रतिदिन विधि विधान से शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप करता है तो, ऐसे जातकों को अपना मनचाहा प्रेम-प्यार व मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, सौंदर्य व प्रेम कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सभी प्रकार के भौतिक सुखों का  कारक ग्रह शुक्र को माना गया है। इन भौतिक सुखों की अंदर ही दांपत्य जीवन का स्थान भी प्राप्त होता है।  इसलिए मनचाहा प्रेम पाने के लिए यदि कोई  जातक नितन्तर शुक्र के इस बीज मंत्र (ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः) का जाप करता है तो, सदैव व अपने मनचाहा साथी को प्राप्त कर जीवन को अपने तरीके जीने लगता है क्योंकि, शुक्र ग्रह जातक को उसी की तरह उसे जीवन जीना सिखाता है जैसा व्यक्ति जीना चाहता है।

शुक्र बीज मंत्र का प्रभाव व फल

  • किसी भी जातक की जन्म पत्रिका में  शुक्र ग्रह की स्थिति अच्छी ना हो  वह जातक अनेकों सुख-सुविधा  वंचित व, पत्नी सुख में कमी, पुरुष के शुक्राणुओं में कमी, समाज में प्रतिष्ठा की कमी होती है|
  • यदि किसी भी जातक की पत्रिका में शुक्र मारक होकर बैठा है, शत्रु राशि में है या त्रिक भावों (छठा भाव, आठवां भाव और बारहवां भाव)में बैठा है और कुंडली में किसी तरह का योग से अशुभ प्रभाव को काट नहीं कर रहा है तो ऐसी स्थिति में जातक शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप  (ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ) कर के शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव को अत्ति शुभ  में बदल सकते है।
  • शुक्र ग्रह का बीज मंत्र व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख देने में समक्ष होता है|
  • शुक्र ग्रह की कृपा होने पर जातक को अपने जीवन साथी का सुख व प्रेम संबंधित बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

मिल सकती इन चीजों में भी सफलता 

साथ ही यदि आप शुक्र ग्रह के क्षेत्र से जुड़े कार्य या उससे जुड़े व्यापार जैसे अभिनेता, मॉडलिंग क्षेत्र  के इच्छुक हो तो आप शुक्र बीज मंत्र का जाप करके सफलता प्राप्त कर सकते हैं। याद रहे यदि शुक्र बीज मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए तभी लाभ होगा|

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