शिव निर्णय 

महादेव जी बोले – पुत्रो ! मै जानता हू कि तुम ब्रह्मा और विष्णु के परस्पर युद्ध से बहुत दुखी हो | तुम डरो मत , मै अपने गणों के साथ तुम्हारे साथ चलता हू | तब भगवान शिव अपने नंदी पर आरुड हो , देवताओ कि ओर चल दिए | वह छिपकर वे ब्रह्मा – विष्णु के युद्ध को देखने लगे | उन्हें जब यह ज्ञात हुआ कि वे दोनों एक दूसरे को मारने की इच्छा से माहेश्वर और पाशुपात अस्त्रों का प्रयोग करने जा रहे है तो वे युद्ध को शांत करने के लिए महा अग्नि के तुल्य एक स्तम्भ रूप में ब्रह्मा और विष्णु के मध्य खड़े हो गए | महा अग्नि के प्रकट होते ही दोनों के अस्त्र स्वयम ही शांत हो गए | अस्त्रों को शांत होते देखकर बह्मा और विष्णु दोनों कहने लगे कि इस अग्नि स्वरूप स्तम्भ के बारे में हमे जानकारी करनी चाहिए | दोनों ने उसकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया | भगवान विष्णु ने शुकर का रूप धारण किया और उसको देखने के लिए नीचे धरती में चल दिए | ब्रह्मा जी हंस का रूप धारण करके ऊपर कि और चल दिए | पातल में बहुत नीचे जाने पर भी विष्णु जी को स्तम्भ का अंत नही मिला | अतः वे वापस चले आए | ब्रह्माजी ने आकाश में जाकर केतकी का फुल देखा | वे उस फुल को लेकर विष्णु जी के पास गए | विष्णु ने उनके चरण पकड़ लिए | ब्रह्माजी के छल को देखकर भगवान शिव प्रकट हुए | विष्णु जी कि महानता से शिव प्रसन्न होकर बोले – हें विष्णुजी ! आप सत्य बोलते है | अतः मै आपको अपनी समानता का अधिकार देता हू |

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जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।।
 
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शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी
की हार्दिक शुभकामनाये ||

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